केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष शुक्रवार को घाटी के लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी। सबकी चिंता बस बार-बार घाटी के सुलगने और अशांत होने को लेकर रही। सबने घाटी को इस चिंगारी से बचाने के लिए स्थायी समाधान की वकालत की। मिलने वाले सभी लोगों का कहना था कि कश्मीरियों को इस आग से किसी भी तरह बचाया जाए।
दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे राजनाथ सिंह ने पहले दिन समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों से मुलाकात की। इसमें पर्यटन, व्यापारिक संगठन, मौलाना, युवा, फल उत्पादकों के साथ ही सिख तथा कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग शामिल थे।
कर्फ्यू के बावजूद त्राल, बडगाम और अवंतिपोरा से पहुंचे युवाओं ने हालात पर चिंता जताई। साथ ही युवाओं को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने, बेरोजगारी का समाधान ढूंढने और देशभर में कश्मीरी के नाम पर हो रहे उत्पीड़न को रोकने की मांग की। कश्मीरी पंडितों ने पर्याप्त सुरक्षा की मांग रखी।
उनका कहना था कि घाटी में कश्मीरी पंडितों की ससम्मान वापसी की बात केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लगातार की जा रही है, लेकिन हालात यह है कि उनके कैंपों पर पत्थरबाजी हो रही है। पुराने हालात की वापसी की कोशिशें की जा रही हैं।
इन पर सख्ती की जानी चाहिए और एक सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों तथा ट्रेडर्स ने बाढ़ के बाद हिंसा से हुए नुकसान का ब्योरा देते हुए शांति स्थापित करने के लिए पहल करने की बात रखी।