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आधी रात को दरवाजे खटकाकर मांग रहे हैं वोट!

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चुनाव प्रचार के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों और अन्य नेताओं के भीड़ जुटाने में पसीने छूट रहे हैं। यूं कहा जाए कि जनसंपर्क और जनसभाएं करने के लिए लोगों का टोटा है।
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दरअसल, लोग फसलों की कटाई और नई फसल की बुआई में जुटे हुए हैं। इसलिए प्रत्याशियों को अपने प्रचार को लोगों तक पहुंचाने के लिए दरबदर होना पड़ रहा है। आलम यह है कि आधी रात को लोगों का दरवाजा खटखटाया जा रहा है और वोट मांगें जा रहे हैं।

जम्मू और कठुआ जिले के मैदानी इलाकों में धान की कटाई चल रही है। इसके अलावा राज्य के पहाड़ी इलाकों में गेहूं और दलहन की फसल की बुआई की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में अधिकतर मतदाता किसान हैं, जो दिनभर काम में लगे रहते हैं। इसलिए उनके पास इतनी फुर्सत नहीं कि नेताओं की सभाओं में शिरकत कर सकें। आलम यह है कि बैठकों में इक्का-दुक्का लोग ही मौजूद रह रहे हैं।
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दिनभर लोगों की वाट जोहने वाले प्रत्याशी आधी रात को मतदाताओं का दरवाजा खटखटा रहे हैं। प्रत्याशी रात को जाकर लोगों से वोट मांग रहे हैं। यहीं नहीं, लोगों से माफी भी मांगी जा रही है कि उन्हें आधी रात को तंग किया। यह कहा जा रहा है कि उनके पास दूसरा कोई वक्त नहीं रहता, इसलिए इस वक्त मिलना पड़ा। ऐसा ग्रामीण इलाकों में आम हो रहा है। अधिकतर प्रत्याशियों की यही हालत है।
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बुआई में व्यस्त लोग नहीं दे रहे प्रत्याशियों को वक्त

फसलों की बुआई और कटाई में व्यस्त रहने वाले किसानों से मिलने के  लिए प्रत्याशियों को घर-घर जाना पड़ रहा है। इसके लिए भी पहले फोन करना पड़ रहा है, ताकि लोग घर पर उपलब्ध रह सकें। सैकड़ों की भीड़ में बोलने वाले प्रत्याशियों को दो-चार लोग भी फोन पर बोलकर इकट्ठे करने पड़ रहे हैं।

अगले दस दिन पहाड़ी और मैदानी इलाकों में कटाई और बुआई का काम चलेगा। इसके बाद ही प्रत्याशियों को सभाएं करने के लिए लोग दिखेंगे। अभी फिलहाल प्रत्याशियों को प्रचार करने के लिए लोगों की बाट जोहनी पड़ रही है। यह भी एक कारण है कि अब तक जम्मू और इसके आसपास के जिलों में किसी भी राजनीतिक दल की बड़ी जनसभाएं नहीं हो रही।
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