चुनाव प्रचार के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों और अन्य नेताओं के भीड़ जुटाने में पसीने छूट रहे हैं। यूं कहा जाए कि जनसंपर्क और जनसभाएं करने के लिए लोगों का टोटा है।
दरअसल, लोग फसलों की कटाई और नई फसल की बुआई में जुटे हुए हैं। इसलिए प्रत्याशियों को अपने प्रचार को लोगों तक पहुंचाने के लिए दरबदर होना पड़ रहा है। आलम यह है कि आधी रात को लोगों का दरवाजा खटखटाया जा रहा है और वोट मांगें जा रहे हैं।
जम्मू और कठुआ जिले के मैदानी इलाकों में धान की कटाई चल रही है। इसके अलावा राज्य के पहाड़ी इलाकों में गेहूं और दलहन की फसल की बुआई की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में अधिकतर मतदाता किसान हैं, जो दिनभर काम में लगे रहते हैं। इसलिए उनके पास इतनी फुर्सत नहीं कि नेताओं की सभाओं में शिरकत कर सकें। आलम यह है कि बैठकों में इक्का-दुक्का लोग ही मौजूद रह रहे हैं।
दिनभर लोगों की वाट जोहने वाले प्रत्याशी आधी रात को मतदाताओं का दरवाजा खटखटा रहे हैं। प्रत्याशी रात को जाकर लोगों से वोट मांग रहे हैं। यहीं नहीं, लोगों से माफी भी मांगी जा रही है कि उन्हें आधी रात को तंग किया। यह कहा जा रहा है कि उनके पास दूसरा कोई वक्त नहीं रहता, इसलिए इस वक्त मिलना पड़ा। ऐसा ग्रामीण इलाकों में आम हो रहा है। अधिकतर प्रत्याशियों की यही हालत है।