रियासत में पिछले सात सालों से लटके पड़े निकाय चुनाव की वजह से केंद्र से मिलने वाली राशि से तो हाथ धोना ही पड़ रहा है। साथ ही विधान परिषद की निकाय कोटे से भरी जाने वाली दो सीटें भी खाली ही पड़ी हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार विधान परिषद की निकाय कोटे की दो सीटें भरी नहीं जाने की वजह से शहरी निकायों में एमएलसी के माध्यम से खर्च होने वाली राशि भी शहरों में खर्च नहीं हो पा रही है। जम्मू कश्मीर में आखिरी बार निकाय चुनाव 2005 में हुए थे और उनका कार्यकाल 2010 में पूरा हो गया था।
इसके बाद से निकाय चुनाव नहीं हो पाए। वर्तमान समय में कश्मीर में जारी माहौल की वजह से अनंतनाग लोकसभा उप चुनाव को भी चुनाव आयोग ने कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए रद्द कर दिया। ऐसे में निकाय चुनाव के इस साल भी होने के आसार कम ही है। इसके अलावा पंचायती चुनाव भी रियासत में लंबित पड़े हैं।
निकाय व पंचायत चुनाव करवाने में हो रही देरी की वजह से केंद्र की तरफ से मिलने वाली करोड़ों की राशि भी नहीं मिल पा रही है। विपक्षी दल कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने जमीनी स्तर के चुनाव करवाने में रियासत की पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार की नाकामी पर कई बार सवाल भी खड़े किए हैं।