सीमा पर फिलहाल शांति है। लेकिन, बीते दिनों पाकिस्तान द्वारा की गई गोलाबारी से वह अब भी डरे-सहमे हैं। हमदर्दी और हौसलाअफजाई के बावजूद गांवों में परिवार कदम रखने से कतरा रहे हैं। पड़ोसी देश की तरफ से नापाक हरकत के तहत की गई गोलाबारी के धमाकों की गूंज और उसके बाद का दृश्य याद करते ही सिहर उठते हैं।
पाकिस्तान द्वारा सीमावर्ती गांवों में कुछ पल की खामोशी के बाद गोलाबारी करना सामान्य सी बात होती जा रही है। कब पाकिस्तान सीजफायर का उल्लंघन कर गांवों में कोहराम की स्थिति पैदा कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता।
इसकी वजह से सीमांत लोगों की रातों की नींद उड़ चुकी है। उन्हें हर वक्त बच्चों की प्रभावित हो रही पढ़ाई और उनके कैरियर की चिंता सताते रहती है। ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों को को हो रही है।
गोलाबारी शुरू होते ही कड़ाके की सर्दी में उन्हें शिविरों में ले जाना पड़ रहा है, जहां सुविधाएं तो मिलती हैं, लेकिन उसमें घर जैसी बात नहीं रहती। इसकी वजह से वह कई तरह की परेशानियों के शिकार होते जाते हैं।
पाकिस्तान पर नहीं कर सकते भरोसा
ग्रामीणों के अनुसार पाकिस्तान का कोई ईमान नहीं है। उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। फ्लैग मीटिंग के कुछ ही समय बाद उस पार से गोलाबारी शुरू कर दी जाती है। इससे पुराने जख्म फिर से हरे हो जाते हैं।
साथ ही परिवार के अन्य सदस्य अपने को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। ग्रामीण बलबीर, राजू, गुरदास, अमीर चंद, महिला रतनो, तारो, शीलो, वीना ने बताया कि उनके गांव सीमा के बिलकुल पास होने के कारण वह अपने परिवार के सदस्यों को गांव में ले जाने से डर रहे हैं।
उनका कहना था कि सीमा पर फिलहाल शांति जरूर है, लेकिन उन्हें पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है। यही कारण है कि अब भी लोग घरों में जाने से डर रहे। उन्होंने बताया कि पुरुष गांवों में जा रहे हैं, लेकिन मवेशियों को चारा डालने के बाद वह भी वापस सुरक्षित स्थानों की ओर आ जाते हैं।