पीडीपी ने स्पष्ट किया है कि विधानसभा भंग करने के राज्यपाल के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने का फिलहाल कोई विचार नहीं है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (जेकेपीडीपी) के प्रवक्ता रफी अहमद मीर ने कहा कि यह मसला सियासी है और उसे उसी ढंग से हल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने राज्यपाल और राम माधव के बयानों की निंदा की।
मीर ने कहा कि राज्यपाल शासन के दौरान रियासत में जो हालात बने थे उसको देखकर हमने सोचा था कि एक सेक्यूलर सरकार बनाई जाए, जो लोगों के हित में हो। इस बारे में संविधान के तहत राज्यपाल से एक पेशकश भी की थी। लेकिन राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने का जो फैसला लिया है वह असंवैधानिक है। मौजूदा हालात को लेकर बैठक के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राम माधव पीडीपी की कोशिशों में पाकिस्तान का हाथ बता रहे और राज्यपाल विधायकों की खरीद फरोख्त की बात कर रहे, जो निंदनीय है।
राज्यपाल द्वारा गठबंधन को अपवित्र बताए जाने पर उन्होंने कहा कि गवर्नर एक जिम्मेदार ओहदा होता है, लिहाजा उन्हें इस किस्म के बयान नहीं देने चाहिए। मीर ने कहा जो लोग भी चुनकर सामने आए हैं, उनको लोगों ने वोट से चुना है। राज्यपाल का काम है शपथ दिलाना और उनकी स्ट्रेंथ चेक करना, न कि किसी गठबंधन को अपवित्र कहना।
रफी मीर ने राम माधव के पाकिस्तान कनेक्शन वाले बयान पर कहा कि माधव सबूत दें। मुझे लगता है कि आने वाले 2019 के चुनावों को लेकर वो ऐसे बयान देकर अपनी कमजोरियां को छिपाना चाहते हैं। विधानसभा के भंग होने के फैसले के बाद पार्टी नेताओं की औपचारिक तौर कोई बैठक नहीं हुई है। हम जल्द बैठेंगे और अगामी रणनीति पर विचार किया जाएगा।