जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की गुत्थी लगातार उलझती जा रही है। पीडीपी-भाजपा गठबंधन को हवा मिलते ही पीडीपी में दो फाड़ नजर आने लगे हैं। पीडीपी नेताओं का कहना है कि सरकार बनाने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन करने से पार्टी की साख को बट्टा लगेगा।
चुनावों में 28 सीटों के साथ पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी है वहीं भाजपा 25 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। मौजूदा हालात में दोनों के बिना सरकार बन पाना संभव नजर नहीं आ रहा है। भाजपा पहले ही साफ कर चुकी है कि उसके बिना रियासत की सरकार नहीं बनेगी।
पार्टी के सभी विधायकों ने भाजपा के साथ सरकार बनाने के प्रस्ताव को खारिज किया है। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी सीएम रहे मुजफ्फर हुसैन बेग पीडीपी-भाजपा गठबंधन को खुलकर समर्थन दे रहे हैं।
'ये हमारी राजनीतिक आत्महत्या होगी'
उधर, पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, रजपोरा से विधायक बने हसीब दरबू ने बेग के फार्मुले को गलत बताया है। एक जनवरी को राज्यपाल से मिलने से पहले पीडीपी के वरिष्ठ नेता सभी विधायकों से निजी तौर पर मिलकर बात कर रहे हैं।
एक पीडीपी एमएलए का कहना है कि अगर हम पीडीपी के साथ सरकार बनाते हैं तो यह हमारे लिए राजनीतिक आत्महत्या के जैसा है, इससे तो बेहतर है रियासत में राज्यपाल शासन लग जाए।
वहीं पार्टी का दूसरा खेमा जो भाजपा के साथ समर्थन के लिए राजी है, का कहना है कि, अगर भाजपा के साथ जाकर सरकार बनती है तो यह हमारे लिए फायदेमंद होगा, छह साल लंबा समय होता है अगर मुफ्ती मोहम्मद सईद सीएम बनते है तो वह अपने अच्छे कामों से जनता का दिल जीत लेंगे और इससे पार्टी को भी लाभ होगा।
गठबंधन नहीं तो केंद्र से दुश्मनी
पीडीपी के लिए भाजपा के साथ जाना एक मजबूरी भी है अगर पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करती है तो यह केंद्र सरकार से दुश्मनी जैसा होगा। ऐसा होने पर केंद्र सरकार से फंड और आर्थिक पैकेज की उम्मीद करना बेमानी होगा।
पार्टी के एक नेता का कहना है कि, घाटी में इस बार ज्यादा वोटर टर्न आउट हुआ है इसका कारण ये है कि जनता नहीं चाहती कि कश्मीर में भाजपा की सरकार बने, अगर हम भाजपा के साथ सरकार बनाते हैं तो अगली बार नेशनल कांफ्रेंस इसका लाभ लेगी।