राज्यसभा चुनाव की तरह विधान परिषद चुनाव में भी पीडीपी का भाजपा पर दबाव काम कर गया है। दबाव के चलते भाजपा ने अपने छठे उम्मीदवार के तौर पर कश्मीर संभाग की सीट से डा. द्राक्षा अंद्राबी का नाम वापस करवा लिया।
विधान परिषद की 11 में से पांच सीटों पर पीडीपी के तीन और भाजपा के दो उम्मीदवारों के निर्विरोध जीत जाने के बाद अब शेष छह सीटों में से पीडीपी दो से तीन और भाजपा केवल दो सीटें ही जीत सकती है। एक सीट पर कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से नेशनल कांफ्रेंस जीत सकती है।
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव में शेष बची छह सीटों पर दो मार्च को होने वाले चुनाव में भाजपा के तीन में से एक उम्मीदवार की हार लगभग तय है। पीडीपी के तीनों उम्मीदवार चुनाव जीत सकते हैं।
हालांकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीत-हार में अहम रोल अदा कर सकते हैं। कुल मिलाकर पीडीपी पांच से छह सीटें जीत सकती है और भाजपा केवल चार।
पीडीपी के तीन उम्मीदवार निर्विरोध जीत चुके
नंबर गेम के हिसाब से भाजपा के पास अपनी 25 सीटों के लिए पीपुल्स कांफ्रेंस के दो और उधमपुर के निर्दलीय विधायक पवन गुप्ता सहित 28 विधायकों का समर्थन हासिल है, जबकि पीडीपी की अपनी 28 सीटों के अलावा एक सीट पर पीडीपी को जंस्कार के निर्दलीय विधायक बाकिर रिजवी का समर्थन हासिल है।
राज्यसभा चुनाव में भी कुल चार सीटों में से पीडीपी के दोनों उम्मीदवार चुनाव जीत गए, जबकि भाजपा का एक उम्मीदवार चुनाव हार गया। पीडीपी को दो और भाजपा को केवल एक सीट ही हासिल हुई।
विधान परिषद में भी गणित के हिसाब से पीडीपी के सभी छह उम्मीदवार चुनाव जीत सकते हैं, जबकि भाजपा के चार उम्मीदवार ही चुनाव जीत पाएंगे।
किन छह सीटों पर दो मार्च को होगा मतदान
जम्मू संभाग की चार सीट
भाजपा- विबोध गुप्ता, रोमेश अरोड़ा, चरणजीत सिंह खालसा
नेकां- सज्जाद अहमद किचलू
पीडीपी- सुरेंद्र चौधरी
इन चार सीटों पर जीत के लिए एक उम्मीदवार को 18 वोट की दरकार
कश्मीर संभाग दो सीट
पीडीपी- जावेद मिर्चाल, सैफुद्दीन भट्ट
नेकां- कैसर जमशेद लोन
इन दो सीटों पर जीत के लिए एक उम्मीदवार को 29 वोट की दरकार