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BJP-PDP की अनौपचारिक वार्ता टूटने के कगार पर

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नई सरकार के लिए भाजपा और पीडीपी में चल रही अनौपचारिक वार्ता टूटने के कगार पर पहुंच गई है। शर्तों से घिरी भाजपा सांप-छुछुंदर की स्थिति से रूबरू है। गठबंधन एजेंडे के विवादास्पद मुद्दों पर गतिरोध के बाद पीडीपी ने शर्तों का पुलिन्दा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेज दिया है।
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पीडीपी अब मोदी के रुख का इंतजार करेगी। पीडीपी ने साफ कर दिया है कि वह कोर इश्यूज पर किसी भी हालत में कोई समझौता नहीं करेगी। पीडीपी के वार्ताकार ने भाजपा आलाकमान को मुप्ती मोहम्मद का संदेश बता दिया है।

उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा को ये शर्तें मंजूर नहीं हो वह नेशनल कांफ्रेंस से गठबंधन कर ले। गतिरोध के बाद केंद्र के मंत्रिमंडल विस्तार में पीडीपी की महबूबा मुफ्ती की इंट्री भी अटक गई है।
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केंद्र पीडीपी को मंत्रिमंडल में एक सीट देने पर सहमत है लेकिन मुफ्ती एजेंडा की मंजूरी के बाद ही कोई फैसला लेना चाहते हैं।

पीडीपी की शर्तों पर संघ परिवार में मतभेद

पीडीपी की शर्तों पर संघ परिवार में मतभेद है। दिल्ली में हार के बाद भाजपा आलाकमान जम्मू कश्मीर में जल्द सरकार गठन करना चाहता है। भाजपा का मानना है कि इससे देश भर के कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हो सकता है।

भाजपा के लिए पहली बार जम्मू कश्मीर की सरकार में शामिल होने का मौका इस बार दिखा। कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस में फिर से हुए गठबंधन ने भी भाजपा की चिंताएं बढ़ाईं। जम्मू संभाग के मतदाताओं ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए वोट दिया।

अगर किसी सूरत में भाजपा सरकार में शामिल नहीं होती है तो भाजपा को भारी नुकसान का खतरा है। लिहाजा भाजपा गठबंधन पर लचीला रुख अपना कर चल रही थी। पीडीपी को संतुष्ट करने के लिए पार्टी ने रोटेशनल सीएम का दावा भी छोड़ दिया था।
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इन मुद्दों से टूट सकती है वार्ता

इस बीच संघ ने सैद्धांतिक मसलों पर नहीं झुकने की नसीहत देकर भाजपा को असमंजस में डाल दिया है। अफस्पा की एक साल में वापसी और अनुच्छेद 370 पर लिखित रूप में यथास्थिति को स्वीकार करने जैसे मुद्दे संघ परिवार पचा नहीं पा रहा है।

संघ की नसीहत के मद्देनजर भाजपा ने विवादास्पद मुद्दों को परे रखकर विकास के मुद्दे पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाने की पहल की थी लेकिन अब पीडीपी ने इस फार्मूले को खारिज कर दिया है।

पीडीपी सूत्रों के मुताबिक अफस्पा की एक साल में वापसी, अनुच्छेद 370 पर यथास्थिति, पाकिस्तान से वार्ता और हुर्रियत से अलग बातचीत जैसे मुद्दे किसी कीमत पर छोड़े नहीं जा सकते। वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को नागरिकता का भी पीडीपी विरोध कर रही है। इसके अलावा पीओके से तमाम बंदिशें हटाने की शर्त है।
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