ग्रामीण रक्षा कमेटी को लेकर सरकार के दो पक्ष सामने आ रहे हैं पीडीपी जहां इसे भंग करने की बात कर रही है तो वहीं बीजेपी इसके पक्ष में खड़ी है।
वीडीसी पर दोबारा बात होनी चाहिए, जहां शांति है तो वहां इसकी कोई जरूरत नहीं है। वीडीसी सिस्टम तब लागू किया गया था जब माहौल सही नहीं था। अब समय है इसे भंग कर दिया जाए।
पीडीपी के मंत्री चौधरी जुल्फीकार अली ने ये बात कही। मंत्री ने ये बात तब कही है जब तीन लोगों को वीडीसी की बंदूक से मार गिराने के बाद नेशनल कांफ्रेंस और कई अलगाववादी गुट इसको भंग करने की मांग कर रहे हैँ।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से बातचीत की जाएगी जो फिलहाल दिल्ली में अपना इलाज करा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में दो घटना मेरे क्षेत्र में हुई हैं और ये दुर्भाग्यपूर्ण है किसी को मारने के लिए सरकारी हथियार का इस्तेमाल किया गया है। अली राजोरी के दलहल क्षेत्र से विधायक हैं।
साफ है कि वीडीसी पर दोबारा विचार होना चाहिए। जहां पर बंदूक आम लोगों के खिलाफ इस्तेमाल हो रही है। इस मुददे पर दोनों पार्टियों के अपने विचार हैं।
उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने कहा था कि अगर कोई जवान या पुलिस वाला कुछ गल करे तो क्या सेना और पुलिस को भी भंग करना पड़ेगा? उन्होंने कहा कि वीडीसी आतंकवाद के खिलाफ सबसे अहम रोल निभा रही है और देहाती क्षेत्र में रह रहे रियासत के लोगों की रक्षा कर रही है।
कुछ मामले हैं वीडीसी मेंबर्स के, इस पर पुलिस और कानून अपना काम कर रहा हैं। दरअसल वीडीसी मेंबर मुश्ताक अहमद ने शमीमा अख्तर और उनके तीन साल के बच्चे तोहिद को राइफल से राजोरी के समोट में गोलियों से भून दिया था, जिसके बाद नेका और कई दूसरे ग्रुप वीडीसी को भंग करने की मांग करने लगे हैं।
वहीं 19 दिसंबर को एक और वीडीसी मेंबर केवल शर्मा ने नेशनल कांफ्रेंस के नेता इश्तियाक को गोलियों से भून दिया था। रियासत में करीब 5000 वीडीसी मेंबर हैं जिन्हें 1992-93 में आतंकवादियों से मोर्चा लेने के लिए आर्मी और पुलिस ने बंदूक दी थी।