विपक्षी दलों से निपटने की बजाय गठबंधन सरकार के दोनों दलों में ही रस्साकशी शुरू हो गई है। भाजपा द्वारा जम्मू के लिए आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) की केंद्र से मांग किए जाने के बाद पीडीपी ने घाटी के लिए आईआईटी और आईआईएम की मांग कर डाली है। पीडीपी सांसद तारिक हमीद कर्रा ने कहा है कि जम्मू की तरह घाटी को उच्च शिक्षा वाले संस्थान देकर दोनों खित्तों का संतुलन बनाया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने जम्मू के लिए एम्स, आईआईटी और आईआईएम देने की घोषणा की थी। लेकिन, बाद में एम्स को कश्मीर शिफ्ट किया गया। लोगों के विरोध के बाद भाजपा नेताओं ने केंद्र से जम्मू को भी एम्स देने की मांग की। इससे पहले कांग्रेस-नेकां सरकार के दौरान भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी की कश्मीर में स्थापना को लेकर विवाद हुआ था। बाद में केंद्र ने जम्मू में भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी की स्थापना को मंजूरी दी थी।
सांसद कर्रा ने कहा, ‘यदि जम्मू को एम्स मांगने का अधिकार है तो घाटी को भी आईआईटी, आईआईएम और आईआईएमसी मांगने का हक है। जो सिर्फ जम्मू में स्थापित किए जा रहे हैं।’ उन्होंने रियासती सरकार को बडगाम जिले के ओमपोरा में धीरू भाई अंबानी इंस्टीट्यूट आफ इन्फारमेशन एंड कम्यूनिकेशन टेक्नालाजी स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाना चाहिए।
2003 में पीडीपी की सरकार ने इस पर सहमति देते हुए बाकायदा जमीन तक एलाट कर दी थी, लेकिन 2005 से यह मामला अपरिहार्य कारणों से अधर में लटका है। इतना ही नहीं, कश्मीर में अलग सरकारी इंजीनियरिंग कालेज बनाने का मुद्दा भी उठने लगा है। रिजनल इंजीनियरिंग कालेज को अपग्रेड कर नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी बनाने के बाद वहां ऐसा कोई संस्थान स्थापित नहीं किया गया।