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कश्मीर हिंसा: भाजपा-पीडीपी वार्ता में गतिरोध

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कश्मीर में जारी हिंसा और तनाव के माहौल के कारण भाजपा-पीडीपी की वार्ता में गतिरोध पैदा हो गया है। नई सरकार के गठन के लिए औपचारिक बातचीत फिलहाल टाल दी गई है। पीडीपी अब अपने कोर इश्यूज पर कोई समझौता नहीं करना चाहती। लिहाजा न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) में फौजी कानून को हटाने की बात को शामिल किए जाने पर जोर दे रही है।
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भाजपा ने दिल्ली चुनाव के नतीजों तक टेबुल पर बातचीत के दौर को टाला था। अनौपचारिक वार्ता का दौर समाप्त हो चुका था लेकिन कश्मीर में हालात बिगड़ने के बाद अब पीडीपी ने औपचारिक वार्ता से फिलहाल कदम पीछे खींच लिए हैं। गतिरोध को समाप्त करने के लिए अनौपचारिक बातचीत का नया दौर दिल्ली में शुरू हो गया है।

संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु की फांसी की बरसी 9 फरवरी को थी। हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान बारामुला में सुरक्षा बलों की गोली से युवक की मौत के बाद तनाव बढ़ा। तिहाड़ जेल में 1984 में मकबूल भट को 11 फरवरी को फांसी दी गई थी।
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उसकी बरसी के दिन बुधवार को भी हिंसक प्रदर्शन हुए। हिंसक प्रदर्शनों और तनाव के कारण श्रीनगर और बारामुला के कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाए गए हैं। ऐसे हालात में पीडीपी सरकार गठन में जल्दीबाजी नहीं करना चाहती है।

कश्मीर को किलिंग फील्ड बनने से रोकना होगा

भाजपा से पीडीपी के गठबंधन पर नेशनल कांफ्रेंस और अलगाववादी पहले से ही विरोध जता रहे हैं। ताजा हालात ने पीडीपी के कदम फिलहाल रोक दिए हैं। अफजल गुरु और मकबूल भट की फांसी की बरसी पर हिंसक प्रदर्शनों का पूर्वानुमान पीडीपी को था। इस कारण से भाजपा के साथ औपचारिक बातचीत को 11 फरवरी तक टाला गया था।

स्थिति सामान्य रहने पर वार्ता 13 फरवरी से प्रस्तावित थी लेकिन फिलहाल इसे फिर से टाल दिया गया है। पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर ने अमर उजाला को बताया कि हम कोर इश्यू के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शामिल करना चाहते हैं। इसलिए उससे पहले अनौपचारिक वार्ता का दौर लंबा हुआ है।

इतनी लंबी-चौड़ी बातचीत इसलिए की जा रही है ताकि कश्मीर को किलिंग फील्ड (मौत का क्षेत्र) बनाए जाने से रोका जा सके। देश के दूसरे हिस्से में पुलिस की गोली से कोई मरता है तो हंगामा खड़ा हो जाता है जबकि कश्मीर में ऐसी मौत को सामान्य रूप से लिया जाता है।

किसी बड़े अधिकारी का कोई बयान आ जाता है और मामला खत्म हो जाता है। इससे बदलना होगा। यही कारण है कि पीडीपी अफस्पा की वापसी को सीएमपी  में जगह दिलाना चाहती है।
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कोर इश्यू पर पीडीपी नहीं झुकेगी पीडीपी

पीडीपी प्रवक्ता ने कहा कि कोर इश्यू पर पीडीपी नहीं झुकेगी। अफस्पा के अलावा पाकिस्तान से बातचीत, क्रास एलओसी ट्रेड और पावर प्रोजेक्टों की केंद्र से वापसी कोर इश्यू में शुमार हैं। इन मुद्दों पर स्थिति साफ होने पर ही औपचारिक वार्ता शुरू हो सकेगी।

एक-दो दिन में शुरू होगी वार्ता: भाजपा
भाजपा के रियासत संगठन मंत्री अशोक कौल का कहना है कि पीडीपी के साथ औपचारिक वार्ता एक-दो दिन में शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह वार्ता जम्मू में होगी। दोनों दलों के वार्ताकार सीएमपी पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने गतिरोध से इनकार किया।
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