रक्षाबंधन पर मंदिरों का शहर जम्मू पतंगों से पटा रहा। खुले आसमान में पतंगों के पेंच लड़ाने के लिए बच्चों से लेकर बड़ों तक में होड़ रही। सूर्य की पहली किरण के साथ शुरू हुआ यह सिलसिला सायंकाल तक चला। मौसम ने भी पतंगबाजों का पूरा साथ दिया। छतों से म्यूजिक सिस्टम के बीच दिनभर चल गईया और बो काटेया की गूंज रही।
चुभन भरी धूप और उमस भी पतंगबाजी के शौकीनों का जोश कम नहीं कर सकी। हालांकि, बीच में कम हवा ने पतंगबाजों की बाजुओं की ज्यादा कसरत करवाई।
पतंगबाजी के लिए रविवार सुबह से ही छतों पर बच्चों के साथ बड़ों की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। कई दिन बाद आसमान साफ होने से पतंगबाजी के शौकीनों के चेहरे खिल गए थे।
बस फिर क्या था हर कोई हाथों में पतंगें और डोर लेकर छतों पर पहुंच गया। छतों पर हर किसी ने मोर्चा संभाल लिया। आसमान में पारंपरिक और चाइनीज पतंगों में हालीवुड और बालीवुड दोनों ही रंग नजर आएंगे।
पतंगों पर छपे हुए मनपसंद अभिनेता युवाओं की पहली पसंद बने। इस बार मोदी भी इस दौड़ में थे लेकिन पारंपरिक पतंगों में अख्खा दार, दरबाज गुड्डा, फरी, मच्छी का जलवा बरकरार रहा।
छोटी पतंगों के बीच कई विशाल पतंगें भी उड़ती नजर आईं। इन पतंगों को विशेष आर्डर पर बनवाया गया था। इनमें 4 से 6 फुट तक की पतंगें आकर्षण का केंद्र रहीं। हालांकि दिनभर हवा के उतार-चढ़ाव से युवा परेशान रहे। कभी हवा का रुख एक तरफ रहता तो कभी दूसरी ओर चला जाता।
पतंगबाजी के दौरान मनोरंजन के भी ढेर सारे इंतजाम किए गए थे। कई छतों पर टेप रिकार्डर तो कई पर डीजे सिस्टम की गूंज थी। मधुर संगीत से जहां युवा मनोरंजन करते रहे, वहीं प्रतिद्वंद्वी की पतंग काटकर उसे हार का अहसास भी कराया गया।
यही नहीं, कई जगह पर माइक के साथ सामने वाली की पतंग काटने पर उसे अपनी जीत का जश्न बताया जाता। शहर के पक्की ढक्की मोहल्ले में कई छतों से माइक से पतंगबाजों ने जोश दिखाया।
पतंगबाजी में युवतियां भी आगे रहीं। देर शाम को सूर्यास्त होने और पतंगबाजी धीमी होने पर जमकर आतिशबाजी हुई। आसमान में उड़ती पतंगों के बीच आतिशबाजी का नजारा देखते ही बना।