रियासत के आखिरी डोगरा शासक एवं जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय करने का ऐतिहासिक फैसला लेने वाले महाराजा हरि सिंह की जयंती 23 सितंबर पर राजकीय अवकाश घोषित करने का निजी सदस्य प्रस्ताव सरकार के इनकार के बावजूद विधान परिषद में ध्वनिमत से पारित हो गया। भाजपा एमएलसी एवं महाराजा के पौत्र अजातशत्रु सिंह ने मंगलवार को इसके लिए निजी सदस्य प्रस्ताव सदन में पेश किया।
अजातशत्रु सिंह ने कहा कि यह मुद्दा महाराजा के परिवार का नहीं, बल्कि रियासत के राष्ट्रवादी लोगों के सम्मान से भी जुड़ा है। 100 साल के स्वर्णिम डोगरा इतिहास से अब तक रियासत के लोगों को दूर रखा गया है। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख को एक सूत्र में पिरोने वाले महाराजा हरि सिंह जिन्होंने भारत में रियासत का विलय भी किया, उनके बारे में युवा वर्ग को ज्यादा जानकारी नहीं है।
कश्मीर में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता रहा है। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई हर धर्म के लोगों की इच्छा और लंबे समय से मांग रही है कि न्याय को अपना धर्म कहने वाले महाराजा को याद करने के लिए कम से कम एक दिन रियासत में अवकाश होना चाहिए।
भाजपा एमएलसी अशोक खजूरिया ने कहा कि रियासत में न्याय का शासन महाराजा हरि सिंह ने स्थापित किया। उनकी प्रतिमाओं के आगे आज तक लोग सिर झुकाते हैं।
विपक्ष की गौरमौजूदगी में प्रस्ताव हुआ पास
जम्मू-कश्मीर विधान परिषद
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पीडीपी के सुरेंद्र चौधरी और फिरदौस टाक ने भी कहा कि महाराजा हरि सिंह के शासन काल में रियासत में जितने विकास कार्य हुए (पनबिजली परियोजना, नहरों का निर्माण, जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे का निर्माण आदि शामिल हैं) उतने उसके बाद अब तक नहीं हुए।
रियासत को विशेष दर्जा भी महाराजा की ही देन है। पीडीपी के एमएलसी विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि महाराजा हरि सिंह के साथ रियासत के लाखों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुईं हैं। सरकार को निजी सदस्य प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए इसको मंजूरी प्रदान करनी चाहिए। भाजपा एमएलसी रमेश अरोड़ा ने कहा कि हाईकोर्ट भी महाराजा हरि सिंह की ही देन है। सुरेंद्र अंबरदार ने भी निजी सदस्य प्रस्ताव का समर्थन किया।
सरकार की तरफ से शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा कि महाराजा हरि सिंह और उनके खानदान का जम्मू-कश्मीर ही नहीं पूरे दक्षिण एशिया में अभूतपूर्व योगदान रहा है, लेकिन, कश्मीर में कुछ लोग इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करते रहे हैं। इसलिए डर यह है कि वे इसे गलत तरीके से पेश कर सकते हैं। सरकार सभी हित धारकों से बात करके इस मसले पर फैसला लेगी।
उन्होंने भाजपा सदस्य अजातशत्रु सिंह से अपील की कि वह अपना प्रस्ताव वापस ले लें। हालांकि, अजातशत्रु सिंह ने अपील को खारिज करते हुए वोटिंग करवाने की बात कही। ध्वनि मत से करवाई गई वोटिंग में पीडीपी और भाजपा के सभी सदस्यों ने प्रस्ताव का पक्ष लिया और प्रस्ताव सदन में पारित हो गया।
इस दौरान विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। वह सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद से विधायकों को बिजली क्षेत्र में सीडीएफ में एक करोड़ दिए जाने के विरोध में पूरे दिन के लिए सदन से वाकआउट कर गए थे।