द्रास कारगिल सेक्टर की उल्टी ढलान पर तैनात छोटी सी टुकड़ी का दुश्मन से सामना हो गया। नायब सूबेदार करनैल सिंह और सिपाही सतपाल सिंह टाइगर हिल, चार्ली फीचर, राकी नॉब और ट्रिग हाइट से हो रही जबरदस्त फायरिंग की जद में थे। दोनों ही दुश्मन से आखिर तक लड़ते रहे।
करनैल सिंह और सतपाल सिंह को वीर चक्र का सम्मान दिया गया। उधर प्वाइंट 4875 की चुनौती पर भारतीय जांबाजों ने दुश्मन को असहाय कर दिया था। पांच जुलाई को 13 जैक राइफल ने जो धावा बोला था, उससे दुश्मन की सप्लाई लाइन और बचने के तमाम रास्ते कट चुके थे।
उस पर 8 सिख रेजीमेंट की अतिरिक्त मदद से दुश्मन के मोर्चे पर खलबली मच गई। बौखलाहट में दुश्मन मोर्चों से भीषण गोलीबारी शुरू हो गई। मरो या मारो की स्थिति को भांपते हुए दुश्मन आर्टीलरी फायर दाग रहा था। ऐसे हालात में साथियों तक मदद पहुंचाना बेहद जोखिम भरा हो गया।
मेजर विकास वोहरा और कैप्टन विक्रम बत्रा ने तमाम चुनौतियों के बावजूद असलहे की सप्लाई का काम पूरा कर दिया। पांच जुलाई की तरह ही छह जुलाई तक दोनों तरफ से गोलाबारी का दौर जारी रहा। कुछेक चोटियाें को छोड़कर भारतीय जांबाज अधिकांश इलाके पर नियंत्रण हासिल करने में कामयाब हो गए, लेकिन दुश्मन की मौजूदगी से खतरा अभी टला नहीं था।