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बिल्केश्वर महादेव मंदिर: पांडवों ने कराया था इसका निर्माण, एक मान्यता ये भी है

Sun, 18 Apr 2021 07:35 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

यह मंदिर अपनी स्थापत्य कला के कारण विशेष स्थान रखता है। दीवारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर की छत लालटेन की आकृति की है। मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग के अतिरिक्त काले पत्थर की अनेक मूर्तियां स्थापित हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पांडवों द्वारा निर्मित बिल्केश्वर महादेव मंदिर में हर रोज बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव का अमरनाथ, मणि महेश के अलावा बिलावर धाम में वास होता है। भगवान शिव की प्राचीन पिंडी की स्थापना, भगवान कृष्ण ने तब करवाई थी जब पांडवों ने अज्ञातवास के अंतिम चरण में बिल्केश्वर महादेव मंदिर का निर्माण किया था। 

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मान्यता के अनुसार बिल्केश्वर महादेव का निर्माण 5000 साल पहले पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय में किया था। दंतकथा के अनुसार जब बिल्केश्वर महादेव मंदिर बिलावर का पांडव निर्माण कर रहे थे, उसी समय हनुमान जी बिलावर में गंगा को लाने में लगे हुए थे। तब 6 महीने की अवधि की एक रात हुई थी। इसका पता तब चला था, जब सरसों का तेल निकालने के लिए तेली ने 6 महीने के स्टाक को एक ही रात में निचोड़ दिया। इसी दौरान मंदिर का निर्माण भी पूरा हो गया। 

कठुआ जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर बिल्केश्वर महादेव मंदिर है, जो जम्मू से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर है। नेशनल हाईवे दयाला चक से बिलावर के लिए निजी बस नियमित मिलती है। विशेष पर्व पर इस मंदिर के प्रति भक्तों की आस्था देखते ही बनती है। मंदिर में भोले शंकर पिंडी रूप में विराजमान हैं।
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कहते हैं कि बिलावर में बेल का जंगल सबसे अधिक हुआ करता था। इसके बीच मंदिर होने के कारण इसे बिल्केश्वर नाम दिया गया है। बिलावर के ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख भारतीय पुरातत्व निर्माण विभाग करता है। 15 वर्ष पूर्व विभाग की ओर से मंदिर की मरम्मत की गई थी। मंदिर नागर शैली से निर्मित किया गया है।
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