जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने घाटी में हिंसा के घाटी में हिंसा के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है । हाइकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि विषम परीस्थितिओं में अनियंत्रित भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाबलों के पास पैलेट गन के इस्तेमाल के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचता ।
याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश एन पॉल वसंताकुमार और न्यायाधीश अली मोहम्मद की पीठ ने कहा कि हिजबुल आतंकी बुरहान वानी की मौत पर घाटी में जैसे हालात हैं, उन्हें देखते हुए पैलेट गन के इस्तेमाल के फैसले को गलत नहीं माना जा सकता ।
कोर्ट ने ये भी कहा कि ऐसी विषम परीस्थितियों में हालात काबू करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में फैसला वहां तैनात अफसरों को करना होता है ।अदालत ये मानती है कि अफसर उनके पास उपलब्ध सभी संसाधनों के उचित उपयोग की पूरी समझ रखते हैं ऐसे में बिना घाटी में स्थितियों की गंभीरता को जाने पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई जा सकती है ।
गृह मंत्रालय ने बनाई थी विशेषज्ञों की कमेटी
श्रीनगर में सुरक्षा बलों पर पथराव करते युवक
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पैलेट गन को दुनिया भर के देशों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिये इस्तेमाल होने वाले एक बिना खतरे के हथियार के रूप में जाना जाता है । पिछले दिनों कश्मीर में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा के दौरान भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा रहा था ।
पैलेट गन के इस्तेमाल को घातक बताते हुए कई बार इस पर रोक लगाने की मांग उठ चुकी है । जिसके बाद पैलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए गृह मंत्रालय ने 26 जुलाई को विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की थी । विशेषज्ञों की इस कमेटी ने पैलेट गन के विकल्प के रूप में मिर्ची ग्रेनेड के इस्तेमाल का विकल्प सुझाया था ।
कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों के लिए ही मुसीबत बना 'मिर्ची बम'
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वहीं दूसरी ओर घाटी में हिंसा पर काबू पाने के लिए पैलेट गन के विकल्प के रूप में आया पावा शेल सुरक्षा बलों के लिए मुसीबत बन गया है।
हवा के विपरीत रुख से इस शेल के धुएं से जवान खुद ही परेशान हो रहे हैं। यही वजह है कि घाटी में सुरक्षा बल इसका उपयोग करने से बच रहे हैं। घाटी भेजे गए 1000 पावा शेल में से अब तक कुछ का ही इस्तेमाल किया गया है।