पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के बाद रियासत में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए गठबंधन सरकार में सहयोगी रही भाजपा ने महबूबा सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। घटना की गृह मंत्री राजनाथ सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व पत्रकार बिरादरी ने तीखी निंदा की थी।
मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव व डीजीपी को दिया था नोटिस
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और राज्य पुलिस प्रमुख को ‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक शुजात बुखारी की हत्या के मामले में गत सोमवार को नोटिस भेजा था।
आयोग ने कहा था कि इस घटना से राज्य में अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। एनएचआरसी ने कहा कि उसने सैमडेन की अपील का स्वत: संज्ञान लिया है, जिसमें उसने एनएचआरसी और राज्य मानवाधिकार आयोग से इस मामले में तेज जांच कराने का निवेदन किया है।