पाकिस्तान फर्जी आईपी के जरिये फोन कॉल्स से पाक एलओसी और घाटी में सुरक्षा व्यवस्था तथा सुरक्षा बलों की तैनाती से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं हासिल करने की कोशिश कर रहा है। यह सिलसिला उड़ी हमले से पहले शुरू हुआ है। अब तक राजोरी और श्रीनगर में ऐसे कई फोन कॉल्स आ चुके हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने सर्विलांस के जरिये ऐसे फोन कॉल्स ट्रेस किए हैं। ऐसे ही एक मामले में श्रीनगर में डीएसपी रैंक के एक पुलिस अधिकारी को निलंबित किया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई इस प्रकार की सूचनाएं एकत्र कर रही है। इनका इस्तेमाल आतंकी हमले में किए जाने की आशंका है।
सूत्रों का कहना है कि यह फोन कॉल्स सेना तथा खुफिया विभाग के बड़े अधिकारी बताकर किए जा रहे हैं। उड़ी हमले से पहले आईबी के एक अधिकारी का हवाला देते हुए सैन्य प्रतिष्ठानों तथा उनकी सुरक्षा के विषय में सूचनाएं मांगी गई थी। इसी प्रकार उड़ी हमले के बाद उड़ी के एक पुलिस अधिकारी को भी ऐसी काल आई था।
खुफिया विभाग के बड़े अधिकारी बनकर कर रहे कॉल
पाक कर रहा फर्जी फोन कॉल
- फोटो : Demp Pic.
श्रीनगर में आर्म्ड फोर्स के कंट्रोल रूम में भी फोन कर सुरक्षा बलों की तैनाती की जानकारी मांगी गई थी। यह फोन काल सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रेस किया था। सूचनाएं साझा करने के बाद इसी मामले में पुलिस अधिकारी को निलंबित किया गया।
राजोरी में भी उड़ी हमले के बाद ट्रैफिक तथा एक्जीक्यूटिव पुलिसकर्मियों को फोन कर आर्मी इंटेलिजेंस का हवाला देते हुए सेना की कानवाय तथा उनकी गतिविधियों की जानकारी मांगी गई थी। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने एसएसपी को सूचना दी थी। इसके चलते ऐसी सूचनाएं शेयर करने से बाद में मना कर दिया गया था।
स्थानीय नंबर ही हो रहा है शो
fraudulent phone calls
- फोटो : Demo Pic.
सूत्रों का कहना है कि सीमा पार से आ रही फोन कॉल्स में नंबर स्थानीय ही शो हो रहा है। इससे सहज रूप से अविश्वास नहीं किया जा सकता। फोन करने वाले को इस बात की पूरी जानकारी होती है कि किस प्रकार की सूचनाएं हासिल करनी हैं।
स्थानीय नंबर होने की वजह से सुरक्षा बलों से जुड़े लोग धोखे में आ जाते हैं। फर्जी आईपी से कोड नंबर वगैरह स्थानीय ही कर लिया जा रहा है। उधर से लैंडलाइन नंबर ही शो हो रहा है।