मुख्य खतरा तालिबान का आत्मघाती दस्ता है, जिसे पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकी हमले के लिए प्रशिक्षण देने के लिए कहा है। खुफिया इनपुट ने सुझाव दिया है कि पाकिस्तान को उन्हें धीरे-धीरे लांच करना है। इसमें आईएसआई भी शामिल है, क्योंकि आईएसआई के समर्थन के बिना इन आतंकवादियों का घुसपैठ करना असंभव है।
सूत्रों के अनुसार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तायैबा उन आतंकवादी संगठनों में शामिल हैं जो जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के लिए खतरा हैं। ये आतंकी संगठन पूर्वी प्रांत कुनार, नंगरहार और नूरिस्तान में हैं, जहां वे अफगान तालिबान की छत्रछाया में काम करते हैं। सूत्रों के अनुसार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का नेतृत्व नूर वली महसूद और उनके डिप्टी कारी अमजद कर रहा है। समूह के बारे में माना जाता है कि कुंअर में लगभग 500 और नंगरहार में लगभग 180 लड़ाकू आत्मघाती हैं।