पाकिस्तान के साथ वार्ता रद्द करने पर आखिरकार पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ी। अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अलगाववादियों के साथ मुलाकात कर पाकिस्तान ने ‘तमाशा’ खड़ा करने का प्रयास किया और भारत को इससे निराशा हुई है।
साथ ही उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्क के साथ बेहतर संबंध बनाने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। मोदी ने कहा कि किसी भी स्तर पर द्विपक्षीय वार्ता के लिए अनुकूल माहौल की जरूरत होती है, जो आतंकवाद और हिंसा से पूरी तरह से मुक्त हो।
'भारत को बात करने में हिचकिचाहट नहीं'
जापानी मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण, सौहार्द और सहयोगात्मक रिश्ता चाहता है। भारत को शिमला एग्रीमेंट और लाहौर घोषणा के तहत अपने पड़ोसी मुल्क से किसी भी मुद्दे पर बात करने में हिचकिचाहट नहीं है।’
उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ हुई मुलाकात को याद करते हुए कहा कि वह एक अच्छी बैठक थी।
हमने बैठकर यह फैसला किया था कि दोनों देशों के विदेश सचिवों को मुलाकात करनी चाहिए और रिश्तों को आगे बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।
परमाणु सिद्धांत की फिर समीक्षा करेगी सरकार
याद रहे कि भारत ने गत 25 अगस्त को दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की बैठक को इसलिए रद्द कर दिया था क्योंकि बैठक से ठीक पहले पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात की थी।
भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि उनकी सरकार परमाणु सिद्धांत की फिर से समीक्षा करेगी और इसे वर्तमान समय की चुनौतियों के मुताबिक तैयार करेगी।
'हम कोई पहल नहीं कर रहे'
इस संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में मोदी ने कहा, ‘मैं आपको बता देना चाहता हूं कि फिलहाल इस संबंध में हम कोई पहल नहीं कर रहे हैं। इस तरह के मुद्दों पर आम सहमति और निरंतरता बनाए रखने की परंपरा है।’
परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) या सीटीबीटी पर भविष्य में भारत के हस्ताक्षर करने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा, ‘परमाणु हथियार वाला देश बनने और परमाणु अप्रसार को बढ़ावा देने के बीच हमारे दिमाग में कोई संशय नहीं है।
परमाणु अप्रसार के मामले में भारत का रिकॉर्ड शानदार है। हम आगे भी इसे जारी रखेंगे।’