अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित उपजिला आरएस पुरा अपनी खुशबूदार बासमती की पैदावार के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यहां की बासमती की मांग अरब देशों में बहुत ज्यादा है और इसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान है।
भारत विशेषकर आरएस पुरा की बासमती की बढ़ती मांग से बौखलाकर ही पाकिस्तान यहां की सीमा पर गोलाबारी करता है, ताकि किसान बासमती की पैदावार न कर पाएं। ऐसा ही इस बार हुआ है। पाक गोलाबारी के चलते हजारों हेक्टेयर भूमि पर किसान बासमती नहीं लगा पाए।
पिछले दिनों पाकिस्तान ने बार्डर पर फायरिंग की। इसकी वजह से मजदूर काम छोड़ कर भाग गए। ऐन मौके पर पाक फायरिंग किसानों को समझ में नहीं आई, लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण यहां की बासमती की विदेश में बढ़ती मांग है।
इस बार विदेश में भी कम ही महकेगी बासमती की खुशबू
पाकिस्तान और भारत ही दो ऐसे मुल्क हैं, जहां सबसे अच्छी बासमती होती है। इसलिए पाकिस्तान ने जानबूझ कर फायरिंग की, ताकि किसान बासमती न लगा पाएं। जानकारी के अनुसार जम्मू, कठुआ और सांबा तीनों ही जिलों में बासमती लगाई जाती है, लेकिन आरएस पुरा क्षेत्र की बासमती सबसे अधिक पसंद की जाती है।
खासकर सीमांत इलाकों की बासमती विश्व प्रसिद्ध है। करीब 30 हजार टन बासमती राज्य से बाहर जाती है। 20 हजार टन बासमती अरब देशों सहित कुछ अन्य देशों में जाती है। इसकी खुशबू और स्वाद की वजह से इसकी मांग है। किसानों को इसके अच्छे दाम मिलते हैं।
भारत की बासमती अरब देशों में अधिक बिकने पर पाक को यह अखर रहा है। कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार 40 हजार हेक्टेयर पर बासमती लगाई जाती है। इसमें से 15 हजार हेक्टेयर बासमती बार्डर के चार से पांच किलोमीटर के दायरे में लगाई जाती है।
अरब देशों में आरएस पुरा की बासमती का होता है निर्यात
प्रति 15 हजार हेक्टेयर पर बासमती की 30 हजार टन पैदावार होती है, लेकिन पाक गोलाबारी की वजह से आरएसपुरा, अरनिया, अब्दुल्लियां, सेक्टर के सात हजार हेक्टेयर पर बासमती की पैदावार नहीं हुई।
पिछले दिनों पाक गोलाबारी की वजह से यहां काम करने वाले मजदूर भाग गए। माना जा रहा है कि इस सात हजार हेक्टेयर पर करीब 15 हजार टन बासमती कम होगी।
स्वाद और खुशबु में दी मात
आरएस पुरा क्षेत्र में किसान 370 रणवीर बासमती लगाते हैं। इसका स्वाद और खुशबू सभी किस्म की बासमती से अव्वल है। बाकी सभी किस्म की बासमती लंबाई में अधिक है, लेकिन उनका स्वाद और खुशबु कम है।
लेकिन रणवीर बासमती का साइज छोटा होने के बावजूद इसकी स्वाद और खुशबू की वजह से अधिक मांग में है। इसका साइज 5 से 5.5 एमएम का रहता है। दो वर्ष पहले सारी बासमती विदेश चली गई थी, लेकिन पिछले वर्ष बाढ़ की वजह से करीब 20 हजार टन बासमती कम हुई।