हिमालय की तलहटी के भारतीय क्षेत्र में व्यापक संभावना के बावजूद प्राकृतिक गैस और तेल भंडार का दोहन भले ही न किया जा रहा हो लेकिन सरहद पार पाकिस्तान की पोटवार घाटी में बड़े पैमाने पर कच्चा तेल निकाला जा रहा है।
दिलचस्प है कि सरहद के इस पार तेल भंडार की संभावना के लिए जो स्थान चिन्हित किए गए हैं सरहद के उस पार पाकिस्तान की पोटवार घाटी से इन इलाकों की हवाई दूरी महज 120 किलोमीटर है। जानकारों की मानें तो यह पूरा इलाका एक ही जैसी भौगोलिक और भूगर्भीय परिस्थितियों वाला है।
ऐसे में तेल और गैस भंडार की संभावनाएं भी एक जैसी ही कही जा सकतीं हैं। हिमालय की तलहटी वाले राज्य जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में आयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन ने दशकों पूर्व इस बाबत खोज शुरू की थी लेकिन पाकिस्तान में सैकड़ों कुओं के प्रयास के मुकाबले भारतीय क्षेत्र में लगभग तीन दर्जन स्थानों पर ही यह प्रयास किया गया जो अपने आप में अधूरा है।
पाकिस्तान तेजी से निकाल रहा है तेल
यूनिवर्सिटी कालेज लंदन के अर्थ साइंसेज विभाग के सीनियर रिसर्च फेलो और मघरिब पेट्रोलियम रिसर्च ग्रुप के सदस्य डॉ. बिंद्रा ठुस्सू के अनुसार पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद से हिमालय की तलहटी से सटे क्षेत्र के तेल भंडार का दोहन तेज कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर से महज 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पोटवार घाटी में जहां दर्जन भर तेल के कुंएं बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का स्रोत बन गए हैं वहीं पेशावर में हाइड्रोकार्बन गैस के भंडार का दोहन हो रहा है। जम्मू-कश्मीर सहित भारतीय क्षेत्र में तेल भंडार के लिए सरकार इच्छाशक्ति नहीं दिखा पाई है।
जम्मू यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट आफ एनर्जी रिसर्च एंड ट्रेनिंग से डॉ. नवीन हक्खू का कहना है कि वर्ष 2008 से तेल और गैस भंडार की संभावनाओं का गहन अध्ययन किया जा रहा है। भूगर्भीय संसाधनों का स्तर पता करने के लिए भारतीय क्षेत्र में पर्याप्त प्रयास होना शेष हैं।
हिमालयी राज्यों में ओएनजीसी ने कब कितने कुएं खोदे
ओएनजीसी
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दशक कुएं
1950-1960 2
1960-1970 10
1970-1980 5
1980-1990 10
1990-2000 4
2000-2010 3
तेल भंडार का स्रोत हैं एक जैसे पत्थर
दुनिया भर में लाइम स्टोन और शेल किस्म के पत्थर ही तेल भंडार की तसदीक करते हैं। हिमालय से सटे इलाके में पृथ्वी का गर्भ लाइम स्टोन 500 मिलियन वर्ष जबकि शेल 40 मिलियन वर्ष पुरानी सतह के साथ तैयार हुआ है। पाकिस्तान के बड़े हिस्से और भारतीय क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना एक जैसी है।