ग्रामीण इलाकों में लगे मोबाइल टावरों को निशाना बनाकर पाकिस्तानी रेंजरों ने गोले दागे हैं। इस गोलाबारी में पहली बार वे गांव भी चपेट में आए, जहां आज तक कभी गोले नहीं पहुंचे। यही नहीं, कानाचक के पुलिस स्टेशन पर गोले पड़े। थाने में लगे एक टावर को निशाना बनाकर गोले दागे गए।
इसमें थाने के एक एएसआई की नई स्विफ्ट कार क्षतिग्रस्त हो गई। 1500 घरों की आबादी वाले गजनसू गांव में इससे पहले कभी गोले नहीं गिरे हैं। गांव के रहने वाले दर्जनों लोगों से बात करने पर एक बात ही सामने आई कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में गोले नहीं देखे। गांव के रहने वाले 70 वर्षीय ओंकार सिंह का कहना है कि वह शुरू से इस गांव में रह रहे हैं। भारतीय और पाकिस्तानी पोस्टों पर तो फायरिंग होती रहती है, लेकिन गांव में कभी भी कोई गोला आकर नहीं गिरा है। गांव में एक टावर लगा हुआ है। इसको निशाना बनाकर गोले दागे।
सुबह छह बजे करीब पंद्रह मिनट के दौरान ही एक दर्जन गोले दागे गए। हालांकि फायरिंग से पहले ही लोग अलर्ट हो गए थे। गांव की एक महिला जरूर घायल हुई, लेकिन बहुत से लोग मरते-मरते बचे। कानाचक पुलिस स्टेशन में भी टावर लगे हुए हैं। इस टावर के बहाने थाने पर भी गोल दागे गए। थाने में कई लोग मौजूद थे। जो इसमें बाल-बाल बचे। गोला थाने के कार्यालय के पीछे आकर गिरा, जिससे खिड़कियों के दरवाजे टूट गए। टावरों को निशाना बनाकर ग्रामीणों पर दागे गोले।
एक गोले ने करा दिया भूकंप का एहसास
मोेर्टार के धमाके के बाद उड़ गई छत
- फोटो : Amar Ujala
अपने कमरे में सोया हुआ था। एकदम से आवाज आई और पूरा घर इस तरह से कांपा जैसे भूकंप आ गया। इससे पहले की कुछ समझ में आता, छत से मलबा उसके सामने टेबल पर आ गिरा। लगा कि आसमान में छेद हो चुका है। समझ में आ गया कि छत पर गोला आकर गिरा है। गांव अब्दुल्लियां में हुई गोलाबारी में लक्की का पूरा परिवार बाल -बाल बचा है।
परिवार के मुखिया नागरमल का कहना है कि सब लोग सोए हुए थे। उनका बड़ा बेटा दूसरे कमरे में सोया हुआ था। तभी रात के दस बजे जोर से धमाका हुआ और उनका पूरा घर कांपने लगा। वह लोग समझ तो गए कि गांव में गोला आकर गिरा है, लेकिन यह नहीं मालूम था कि अपने ही घर पर गिरा है।जब दूसरे कमरे से बेटे के चीखने की आवाज आई तो समझ में आ गया कि घर कांपने का क्या कारण था। लक्की जिस बिस्तर पर सोया था। उसके ठीक पास में ही छत के ऊपर गोला गिरा।
कमरे में छत से गिरे मलबे से साफ जाहिर हो रहा था कि यदि गोला छत को फाड़कर अंदर आकर फट जाता तो लक्की और उसके परिवार की जान चली जाती। नागरमल के परिवार में उसके दो बेटे, एक बेटी और पत्नी रहते हैं। नागरमल का कहना है कि वह शुक्र मना रहा है कि उनके परिवार की बाल बाल जान बच गई। इसी गांव में पिछले साल भी गोला गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। दो अन्य लोग घायल हुए। अब तक लोग उसकी मौत को नहीं भूल पाए हैं।