जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को-आपरेटिव सोसायटी को आदेश दिया है कि दो माह के अंदर को-आपरेटिव सोसायटी के चुनाव कराए जाएं। इसके लिए एक्ट के तहत एक महीने में प्रक्रिया को पूरा ली जाए। उल्लेखनीय है कि सोसायटी की चुनी हुई प्रबंध कमेटी व बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन नए चुनाव नहीं कराए गए।
मुख्य न्यायाधीश एन. पाल बसंथा कुमार और अली मोहम्मद मागरे की कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने 31 नवंबर 2015 के सिंगल बेंच के आदेशों को चुनौती दी थी। इसमें एसआरओ 236 दिनांक 25 अप्रैल 2013 के तहत को-आपरेटिव सोसायटी एक्ट 1989 के रूल 20, 21, 23 के संशोधन के आदेश थे।
इस एसआरओ में रजिस्ट्रार को-आपरेटिव सोसायटी को असिस्टेंट कमिश्नर राजस्व को रिटर्निंग आफिसर नियुक्त करके चुनाव कराने के आदेश दिए गए थे। कार्यकाल पूरा कर चुकीं विभिन्न को-आपरेटिव सोसायटी की कमेटियों के चुनाव कराने के आदेश दिए गए थे। निचली अदालत में बताया गया कि याची विभिन्न को-आपरेटिव सोसायटीज के सचिव रहे हैं।
समय-समय पर सोसायटीज का रजिस्ट्रेशन भी होता रहा है। जम्मू-कश्मीर को-आपरेटिव सोसायटीज रूल 2001 के तहत कमेटी व बोर्ड के चुनाव कराना अनिवार्य हैै। रजिस्ट्रार को-आपरेटिव इन चुनावों को करा सकता है। याचिका में सवाल उठाए गए हैं कि एसआरओ 236 आफ 2013 से जारी करने के दौरान चुने गए सदस्यों की राय नहीं ली गई।
खंडपीठ ने सवाल किया कि जब कई साल पहले सदस्यों को चुनावों के जरिए चुना गया, तो कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव क्यों नहीं कराए गए। चुनाव कराने के लिए जम्मू-कश्मीर को-आपरेटिव सोसायटी एक्ट 1989 के प्रावधानों पर गौर करना चाहिए।
रजिस्ट्र्रार को-आपरेटिव सभी सोसायटीज के चुनाव कराने के लिए अधिकृत हैं। वह नई कमेटी का चुनाव करा सकते हैं। खंडपीठ ने रजिस्ट्रार को-आपरेटिव को आदेश दिया कि कार्यकाल पूरा कर चुके बोर्ड या कमेटी का चुनाव कराएं।