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जम्मू में सैन्य वर्दी बेचने वालों की जांच के आदेश जारी

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शहर में दुकानों पर बिकने वाली सैन्य और खाकी वर्दी शरारती एवं देश विरोधी तत्वों के हाथों में लग सकती है, जिससे बड़ा नुकसान होने की आशंका है।
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खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू के जिला उपायुक्त को इसके बारे में सूचना दी है कि सैन्य वर्दी और खाकी बेचने वाले, लेने वाले और सिलने वालों पर तुरंत जांच हो।

इसे देखते हुए जिला उपायुक्त ने पंद्रह दिन के भीतर सैन्य वर्दी, खाकी बेचने, स्टोर, सिलने और खरीदने वालों को अपने दस्तावेजों के जांच कराने के आदेश दिए हैं। जिला उपायुक्त सिमरनदीप सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
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सैन्य वर्दी बेचने वाले को देनी होगी जानकारी

जानकारी के अनुसार जारी आदेश में कहा गया है कि पंद्रह दिन के भीतर शहर में जो कोई भी दुकानदार, डीलर, विक्रेता सैन्य वर्दी और खाकी बेचता है, वह अपने संबंधित पुलिस स्टेशन में जाएगा। वहां वह इसके बेचने और खरीदने के दस्तावेज चेक करवाएगा।

इसके अलावा हर पंद्रह दिन के बाद दुकानदार या डीलर को थाने में जानकारी देनी होगी कि उसने पंद्रह दिन में किसको और कितनी वर्दी बेची। हर दुकानदार को एक रजिस्टर तैयार करना पड़ेगा।

किसको, कितने बजे, कितनी मात्रा में, कौन सी वस्तु, खरीदने का मकसद, लेने वाले का नाम-पता, पहचान पत्र आदि सब रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए।

यह रजिस्टर और सामान की सूची हर समय दुकानदार के पास उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि कभी भी जांच करने पर जानकारी मिल सके। किसी भी केंद्रीय और राज्य सुरक्षा कर्मी को सामान देने से पहले उसका पहचान पत्र देखना होगा। 
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क्या है सैन्य वर्दी खरीदने का प्रावधान

सेना और पुलिस से जुड़ी वस्तुओं में दुकानों पर सेना की वर्दी का कपड़ा, पटका, बेल्ट, जूते, अंडर शर्ट, जैकेट, स्वेटर, टोपी, आदि उपलब्ध है। यह सब सामान बेचने के लिए दुकानदार को जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होती है।

दुकानदारों को साफ निर्देश हैं कि किसी को भी यह सामान देने से पहले उसकी पहचान होनी चाहिए। जो बहुत कम होता है। शहर में लगभग हर रेडीमेड दुकान पर सैन्य वर्दी वाला ट्राउजर और जैकेट उपलब्ध है, जिसे कोई भी खरीद सकता है।
 
पिछले एक दशक में जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, उनमें आतंकियों ने सेना की वर्दी का इस्तेमाल किया। बीते वर्ष अरनिया, सांबा, कठुआ, पठानकोट, दीनानगर, उड़ी सैन्य कैंप आदि में आतंकियों ने सैन्य वर्दी पहनकर ही घुसपैठ की और हमला किया।
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