सिविल सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उप-राज्यपाल ने कहा कि मई-जून में अघोषित बिजली कटौती को रोकने के लिए तैयार योजना के तहत कई बैठकें की गई थीं। लोगों को बेवजह परेशानी के लिए दोषी लोगों को माफ नहीं किया जाएगा। इसके लिए उच्चतम सजा तय की जाएगी।
जम्मू संभाग में बिजली की अघोषित कटौती से मचे हाहाकार पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता को जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उप-राज्यपाल ने जम्मू संभाग के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि मैं आपका पसीना व्यर्थ नहीं जाने दूंगा और जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी। संभाग को जिस अनिर्धारित बिजली कटौती का सामना करना पड़ा वह सामान्य नहीं था।
विज्ञापन
उप-राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हर साल नुकसान के बावजूद 3500 करोड़ रुपये बिजली पर खर्च किए जा रहे हैं। व्यवस्था सुधार किया गया है जिसके परिणाम स्वरूप सर्दियों में कश्मीर में लोगों को बर्फबारी के दौरान भी नियमित बिजली आपूर्ति मिलती रही।
70 साल के बराबर चार वर्ष में बिजली बनाकर 24 घंटे देंगे आपूर्ति
उप-राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भारी जल संसाधन के चलते बिजली क्षमता में 14867 मेगावाट की कुल पहचान की गई है। पिछले 70 वर्षों में केवल 3504.90 मेगावाट का उपयोग किया जा सका है। पिछले 11 माह में जिन परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया है, उससे अगले चार वर्ष में 3500 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। ट्रांसमिशन नेटवर्क में विस्तार से चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। उप-राज्यपाल ने कहा कि डिवीजनल स्टोर्स के अलावा दूरदराज के इलाकों में ट्रांसफार्मर, खंभे और कंडक्टर का पर्याप्त स्टाक जमा है।