रियासती कबीना की नई भर्ती नीति को मंजूरी पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। यहां तक कि भर्तियों में पारदर्शिता न होने पर कड़ा विरोध करने की भी चेतावनी दे डाली है। नेशनल कांफ्रेंस के संभागीय प्रधान एवं विधायक देवेंद्र सिंह राणा का कहना है कि सरकार के पास अगर खाली पद हैं तो फास्ट ट्रैक के आधार पर स्थायी नियुक्तियां होनी चाहिएं।
कांट्रैक्चुअल नियुक्तियों से युवाओं में असुरक्षा की भावना पैदा होगी। यह कौन तय करेगा कि प्रदर्शन सही है या नहीं। भर्ती नीति में कई खामियां दिख रही हैं। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा का कहना है कि नई भर्ती नीति में जिला स्तर पर भर्तियां करने की बात कही गई है।
ऐसी भर्तियों में पारदर्शिता का पैमाना क्या रहेगा। जिला उपायुक्तों की ओर से की जाने वाली भर्तियों में जवाबदेही और पारदर्शिता पर संशय रहता है। स्वायत्त अधिकारों वाले भर्ती बोर्डों की अहमियत बरकरार रहनी चाहिए। नई भर्ती नीति का अध्ययन कर कांग्रेस इस पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया पेश करेगी।
फिलहाल पहली नजर में नई भर्ती नीति पर कई सवाल उठ रहे हैं। जिला स्तर पर डीसी अगर भर्र्ती करेंगे तो सियासी खासतौर से सत्ताधारी दलों का हस्तक्षेप रह सकता है। जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष बलवंत सिंह मनकोटिया का कहना है कि नई भर्ती नीति में अगर पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी हुई तो पार्टी इसका कड़ा विरोध करेगी।
पैंथर्स पार्टी चाहती है कि तेजी से रिक्त पड़े पदों को भरा जाए, लेकिन मेरिट के आधार पर ही भर्ती होनी चाहिए।