केंद्रीय आम बजट का राजनीतिक दलों में कहीं स्वागत तो कहीं विरोध हुआ है। भाजपा ने बजट को जन मैत्री वाला बताया तो कांग्रेस ने बजट को दिशाहीन करार दिया है। नेशनल कांफ्रेंस ने बजट में जम्मू-कश्मीर की अनदेखी करने की बात कही है।
हालांकि किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए बजट प्रावधानों को सराहा भी है। पैंथर्स पार्टी ने भी जम्मू-कश्मीर के लिहाज से आम बजट को नाउम्मीदी वाला बताया है।
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सत शर्मा सीए का कहना है कि केंद्रीय आम बजट जन मैत्री वाला है। पिछले कई दशकों से देश को इस तरह के बजट का इंतजार था। उनका कहना है कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के तीसरे बजट में विकास और समाज के हर वर्ग खासतौर से महिलाओं, गरीबों के हित और कल्याण वाला बताया है।
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने केंद्रीय आम बजट को अच्छे दिनों के वादे को पूरा करने की दिशा से भटका हुआ बताया है।
आम जनता पर बोझ बढ़ा दिया गया: मीर
मीर का कहना है कि देश की आम जनता पर कर बोझ को बढ़ा दिया गया है और इससे महंगाई तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने बजट को युवा, किसान और निम्न और मध्य वर्ग व कर्मचारी वर्ग खासतौर से आम जनता के हितों के खिलाफ बताया है।
उनका कहना है कि आयकर छूट स्लैब में बढ़ोतरी न किए जाने की वजह से कर्मचारी वर्ग को नुकसान होगा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लिहाज से बजट में बाढ़ प्रभावितों, रिफ्यूजियों, कश्मीरी विस्थापितों और रियासत को स्मार्ट सिटी व एम्स की दिशा में कोई घोषणा न होने पर मायूस करने वाला बताया है।
नेशनल कांफ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद सागर का कहना है कि जम्मू कश्मीर के लिए बजट में कोई घोषणा नहीं हुई। इससे मायूसी हुई है।
रियासत के लिए बजट में विशेष प्रावधान करने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हालांकि बजट में ग्रामीण विकास और किसानों के लिए किए प्रावधान स्वागत योग्य हैं।
पैंथर्स पार्टी के चेयरमैन हर्ष देव सिंह ने बजट को मायूस करने वाला बताया है। उनका कहना है कि रियासत के लिए बजट में कुछ नहीं है। न तो स्मार्ट सिटी है और न ही बाढ़ प्रभावितों को राहत और पुनर्वास के लिए कुछ राहत पैकेज। बजट से महंगाई बढ़ेगी। महिलाओं के अलावा कर्मचारी वर्ग को भी निराशा हाथ लगी है।