सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस और विपक्षी दल पीडीपी भूमि घोटाले के आरोपों पर वीरवार को विधान परिषद में आमने-सामने आ गए। नेकां सदस्यों ने दस्तावेज पेश करते हुए पीडीपी नेताओं पर संगम खन्नाबल जिला अनंतनाग में चार हजार कनाल सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने के आरोप लगाए।
नेकां सदस्यों ने जांच के लिए हाउस कमेटी के गठन की मांग उठाई। प्रश्नकाल के दौरान 45 मिनट तक इस मसले पर हंगामा हुआ। आधे घंटे तक नेकां के अधिकतर सदस्य बेेल में नारेबाजी करते रहे। इस दौरान विधान परिषद चेयरमैन अमृत मल्होत्रा और नेकां एमएलसी देवेंद्र राणा के अलावा नेकां-पीडीपी सदस्यों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी रहा।
राजस्व मंत्री एजाज अहमद खान की सदन में सफाई के बाद चेयरमैन अमृत मल्होत्रा ने मुख्य सचिव को जांच का आदेश जारी कर जल्द रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा। इस परिदृश्य के बीच सभी कांग्रेस एमएलसी खामोशी के साथ नेकां और पीडीपी की तकरार देखते रहे। प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू होते ही नेकां एमएलसी डा. बशीर अहमद वीरी ने इस मसले को उठाया। उन्होंने कहा कि पीडीपी नेताओं ने कृषि उपयोगी जमीन का अतिक्रमण कर इसका इस्तेमाल गोदाम बनाने और अन्य कार्यों के लिए करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वीरी और नेकां एमएलसी परदेसी ने आरोपों सेे संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां लहराते हुए जांच के लिए हाउस कमेटी के गठन की मांग करने लगे। वीरी ने कहा कि यह 1600 करोड़ रुपये की जमीन है। सरकारी जमीन के रिकार्ड में हेरफेर कर तीस करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया। नेकां सदस्यों ने कहा कि इससे संबंधित एक पत्र पर मुफ्ती के हस्ताक्षर हैं। इस पर पीडीपी सदस्य भड़क गए। पीडीपी सदस्यों ने नेकां नेताओं का नाम लिए बगैर कहा कि आपने तो गुपकार और पावर प्रोजेक्ट भी बेच दिए।
इस मौके पर योजना एवं विकास मंत्री अजय सडोत्रा ने तुरंत अपना पक्ष रखते हुए हाउस कमेटी बनाने का आग्रह चेयरमैन से किया। इस पर पीडीपी के एमएलसी भड़क गए और आरोपों को निराधार बताने लगे। नेकां की तरफ से मोर्चा देवेंद्र राणा ने संभाल लिया। राणा ने चेयरमैन के सामने मामले को हाउस कमेटी को सौंपने की वकालत की। इस पर चेयरमैन ने राणा को कहा कि वह उनको हिदायत नहीं दे सकते। वह शांत रहे अन्यथा उन्हें सदन की कार्यवाही से निलंबित किया जाएगा। पीडीपी एमएलसी नईम अख्तर ने राणा से कहा कि खामोश रहिए, जवाब में राणा ने कहा कि आपको सब जानते हैं।
इस दौरान पर्यटन मंत्री जीएम मीर ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए निष्पक्ष जांच का सुझाव देकर मसले को शांत करने की कोशिश की। बहस के बीच राजस्व मंत्री एजाज अहमद खान सदन में पहुंचे और इस मसले पर अपना पक्ष रखा। एजाज खान ने कहा कि सदन को गुमराह किया जा रहा है, मसला सिर्फ 72 कनाल जमीन से संबंधित है। यह अलाटमेंट राजस्व विभाग ने जमीन को कृषि उपयोगी बनाने के लिए की थी। यह हकीकत है। 72 कनाल जमीन के इस्तेमाल में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
जहां तक जमीन से संबंधित रजिस्ट्री अथवा न्यायालय की प्रक्रिया संबंध है, उसका राजस्व विभाग से कोई लेनादेना नहीं। वह इस मामले में हर प्रकार की जांच को तैयार हैं। क्राइम ब्रांच अथवा हाउस कमेटी किसी भी जांच का आदेश चेयरमैन कर दें। इसके बाद चेयरमैन ने राज्य के मुख्य सचिव इकबाल खांडे को आरोपों की जांच कर इसकी रिपोर्ट सदन में पेश करने की हिदायत दी। इसके बाद महज 15 मिनट तक प्रश्नकाल की कार्यवाही चल सकी।