संघर्ष विराम से खुश अखनूर के जीरो लाइन की पंचायत सामोआ के लोग का कहना है कि जब से गोलाबारी थमी है, तब से अमन और चैन से रह रहे हैं। इससे पहले बहुत ही मुश्किलों का सामना किया है। शाम को जब खाना खाने बैठते या सोने की तैयारी करते तो पाकिस्तान गोलाबारी कर देता था। गोले गांवों में गिरते तो दशहत में घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की ओर भागना पड़ता था।
स्थानीय ग्रामीणों गोपाल, दास पूर्ण चंद, मगां राम, राधा कुमारी आदि ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। खेती नहीं कर पाते थे, दिहाड़ीदारों का रोजगार छिन जाता था। दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी मुश्किल हो जाता था। कई-कई बार रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ती थी। जब से संघर्ष विराम हुआ है, तब से हम लोग अमन और चैन के साथ जिंदगी बिता रहे हैं। बिना किसी डर के घर से लेकर खेतों तक के काम कर रहे हैं। बच्चे नियमित शिक्षा हासिल कर रहे हैं। अब हमारी सरकार से अपील है कि हमारी जो उपजाऊ भूमि कारगिल युद्ध के दौरान से सेना के अधीन है, उसे वापस दिया जाए और दोनों देशों के बीच की फेंसिंग को जीरो लाइन पर ले जाया जाए। ताकि हम लोग फेंसिंग के अंदर की बंजर बन चुकी भूमि पर फिर से खेतीबाड़ी कर सकें।
पंचायत की छात्रा संजीवनी वर्मा तथा भारती शर्मा ने बताया कि अब हम लोग बिना किसी खौफ के स्कूल जा रहे हैं। संघर्ष विराम से पहले जब हम स्कूल पहुंचते थे तो गोलाबारी शुरू हो जाती थी। कई-कई बार तो महीनों स्कूल बंद रहते थे।