राजबाग पुलिस थाने पर हुए फिदायीन हमले को ठीक उसी तरह से अंजाम देने का प्रयास किया गया, जैसे डेढ़ वर्ष पूर्व हीरानगर थाने पर किया गया था। लेकिन, इस बार न सिर्फ आतंकियों की रणनीति फेल हो गई, बल्कि पांच घंटों तक असलहा होने के बावजूद फिदायीन ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाए।
पुलिस थाने के भीतर गुजरे उन पांच घंटों के दौरान क्या कुछ हुआ अमर उजाला ने जब इसकी पड़ताल की तो पाया कि दो में से एक आतंकी को हमले के शुरुआती लमहों में ही ढेर कर दिया गया था। इससे दूसरे आतंकी को थाने के गलियारे में कैद होकर रहना पड़ा। दरअसल, शुक्रवार को दो सदस्यीय फिदायीन दस्ता जैसे ही थाने की इमारत के भीतर पहुंचा, तो उनमें से एक आतंकी हीरानगर पुलिस थाने की तरह ही दूसरी मंजिल पर ग्रेनेड उछालकर सीधा ऊपर भागा।
ताकि, धमाके से छाई बदहवासी के बीच वह दूसरी मंजिल पर मौजूद जवानों का सफाया कर सके। लेकिन, दूसरी मंजिल पर त्वरित एक्शन में आए सीआरपीएफ के जवान अपनी पोजीशन संभाल चुके थे। जैसे ही आतंकी को उन्होंने सीढ़ियां चढ़कर ऊपर आते देखा, उसे वहीं पर ढेर कर दिया। दूसरा आतंकी थाने की इमारत के गलियारे में फंस गया।
ऊपर से सीआरपीएफ के जवान मोर्चा संभाले हुए थे, तो गलियारे के ठीक सामने बाहर से सुरक्षा बलों ने उसे ज्यादा हरकत करने का अवसर नहीं दिया। पुलिस थाने में तैनात कर्मियों ने बताया कि थाने की पहली और दूसरी मंजिल में मौजूद जवान लगातार आतंकी की गतिविधियों को महसूस कर रहे थे।
यह आतंकी थाना प्रभारी के कक्ष में सिर्फ एक बार आया। इसके बाद वह गलियारे में ही फंसकर रह गया। फाइनल असाल्ट के दौरान जब आंसू गैस का गोला भीतर फेंका गया, तो वह चिल्लाता हुआ फायरिंग करते हुए बाहर की ओर भागा। इसी दौरान उसे भी ढेर कर दिया गया।