केंद्र और रियासती सरकार की ओर से कश्मीरी विस्थापितों के लिए घाटी वापसी और पुनर्वास के लिए 1618.40 करोड़ की राशि मंजूर होने के बावजूद विस्थापितों का समर्थन योजना को नहीं मिला है। हालांकि योजना के दो घटक विस्थापित युवाओं को रोजगार देने और घाटी में ट्रांजिट कैंपों का निर्माण पूरा हो चुका है।
विधान परिषद में नेकां सदस्य डा. बशीर अहमद वीरी के सवाल के जवाब में सरकार की ओर से लिखित में यह जवाब दिया गया है। जवाब में सरकार की ओर से बताया गया कि वर्ष 1990 में कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के अलावा सिख और मुस्लिम समुदाय के भी कुछ परिवारों का पलायन जम्मू और देश के विभिन्न हिस्सों में हुआ।
इनमें 41,117 परिवार जम्मू में पंजीकृत हैं जबकि 21,333 विस्थापितों के परिवार देश के बारह राज्यों में पंजीकृत हैं। विस्थापितों के परिवारों में 37,128 हिंदू, 2,246 मुस्लिम और 1738 सिख परिवार शामिल हैं।
जम्मू के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में कश्मीरी विस्थापित परिवारों में दिल्ली में 19,338 परिवार, हिमाचल प्रदेश में 11, हरियाणा में 924, चंडीगढ़ में 114, पंजाब में 319, उत्तर प्रदेश में 222, उत्तरांचल में 57, मध्य प्रदेश में 43, तामिलनाडु में एक, कर्नाटक में 38, महाराष्ट्र में 208, राजस्थान में 58 कश्मीरी विस्थापितों के परिवार रहे है।
राहत एवं पुनर्वास मंत्री की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि 1618.40 करोड़ के वापसी और पुनर्वास पैकेज को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मंजूर करने के बावजूद कश्मीरी विस्थापित घाटी में लौटने को तैयार नहीं हुए हैं।