प्रभावित परिवारों के आंसू सूख नहीं पा रहे हैं। इस आपदा में इस गांव के 14 लोग बेघर हुए हैं। जिनके पास दूसरे कस्बों में अपना ठौर था, वे वहां शिफ्ट हो गए हैं। बाकी पड़ोसियों-रिश्तेदारों के घर दिन काट रहे हैं। बेघर लोग सरकार से दूसरी जगह बसाने के साथ आवास की मांग कर रहे हैं।
समितियों के नुकसान आकलन का इंतजार
उपराज्यपाल की ओर से इस आपदा से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए बनाई गई टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। केंद्रीय टीम भी आई थी मगर उस दौरान भारी बारिश के कारण वह अपना आकलन नहीं कर सकी।
उसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को वहां जाना था मगर मौसम की खराबी के चलते ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंस कर जानकारी ली। उन्होंने तात्कालिक राहत के तौर पर वहां बेली ब्रिज के साथ पॉडर में सैनिक स्कूल खोलने की सहमति जताई।
उन्होंने पाडर-नागसेनी के विधायक सुनील कुमार शर्मा व जिला प्रशासन को कई निर्देश जारी किए थे। गृह मंत्री अमित शाह भी मौसम की खराबी के कारण चिशोती नहीं पहुंच सके थे मगर उन्होंने वहां सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
दो सप्ताह बाद खुला खुला चिशोती मार्गदो सप्ताह से बंद चिशोती मार्ग वाहनों के लिए खोल दिया गया है। भारी बारिश के चलते किश्तवाड़ से चिशोती तक दर्जनों जगहों पर भारी भूस्खलन से मार्ग मंद था। किश्तवाड़ से पाडर गुलाबगढ़ व बीकन (ग्रेफ) तक काम चल रहा है। वहां से चिशोती तक पीएमजीएसवाई काम में लगी है। किश्तवाढ़ से साढ़े 8 किमी दूर डूल इलाके के पास पड़े बोल्डर भी हटा दिए गए हैं।