मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी का संकट हल करने का एकमात्र रास्ता वार्ता है। सीमा पर झड़पों ने हमेशा आम लोगों को दुखी करने के अलावा उनके जीवन को मुश्किलों में डाला है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी से सीमावर्ती इलाकों के लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री मंगलवार को सीमावर्ती इलाकों में पहुंचे और पिछले दिनों पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी से हुए नुकसान का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ज्योडा फार्म में उस कुल्ले में भी पहुंचे, जहां पाक शेल गिरने से पिता-पुत्र की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान गोलाबारी से प्रभावित परिवारों को तीन माह तक मुफ्त राशन मुहैया करवाने की घोषणा भी की।
मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट के इन क्षणों में सरकार आपके साथ है और हर तरह से उन्हें मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार गोलाबारी से प्रभावित लोगों को एसआरओ 43 का लाभ देगी और अधिग्रहण की गई उनकी जमीन का मुआवजा देने का मामला कैबिनेट में रखेंगे।
इसके अलावा सीमांत इलाकों में बंकर बनाने का मामला पहले ही सरकार ने गंभीरता से उठाया है। वर्तमान में यह मामला केंद्र सरकार के पास लंबित है, जिसे रियासत के दौरे पर आने वाले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष उठाया जाएगा।
साथ ही गोलाबारी का शिकार होने वाले पिता-पुत्र के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के आवश्यक निर्देश भी दिए। उमर ने कहा कि सीमा पर शांति दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। उमर ने कहा, ‘हम कभी भी युद्ध नहीं चाहते। लेकिन विवादित मुद्दों का हल बातचीत और शांतिपूर्ण ढंग से चाहते हैं। पड़ोसी दोस्ती रखता है तो दोनों देशों की भलाई है।’
राजनीति करने नहीं दुख दर्द बांटने आया हूं
वहीं ज्यौडिया फार्म में ग्रामीणों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पाक गोलाबारी से सीमांत ग्रामीणों को हुए नुकसान का उन्हें दुख है। गोलाबारी के समय जान गंवाने वालों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन परिवार की पीड़ा समझ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कोई राजनीति करने के लिए ग्रामीणों के बीच नहीं पहुंचे हैं, बल्कि अपना फर्ज निभाने और दुख-दर्द बांटने के लिए आए हैं।
उन्होंने कहा कि तरणजीत सिंह टोनी सहित क्षेत्र के ग्रामीणों ने जिन दिक्कतों के बारे में जानकारी मुहैया करवाई है, उसके समाधान के लिए साथ आए जिलाधीश से उस पर अमल करने के लिए निर्देश दिया है।
इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ गृह राज्यमंत्री सज्जाद अहमद किचलू, नेकां के प्रांतीय प्रधान देवेंद्र सिंह राणा, जिलाधीश जम्मू अजीत कुमार साहू आदि मौजूद थे।