पंचायत चुनाव पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चुनाव में अधिकाधिक संख्या में लोगों से भागीदारी की अपील कर रही हैं, लेकिन लोगों में विश्वास कायम नहीं करा पा रही हैं। लोगों में विश्वास जगाना होगा।
उनके विधानसभा क्षेत्र में श्रीनगर लोकसभा उप चुनाव के दौरान फारूक अहमद डार नामक युवक को सेना के वाहन पर रस्सी से बांधकर घुमाया गया। वह वोट डालकर निकला था। राज्य मानवाधिकार आयोग ने उसे मुआवजा देने की बात कही, लेकिन वह भी नहीं दिया गया।
इसका कारण भी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। अच्छा होता कि वह पत्थरबाज होता। कम से कम हुर्रियत वाले तो उसका साथ देते। एक वोटर के साथ हुई नाइंसाफी में तो इंसाफ दिला नहीं सके, फिर कैसे विश्वास जगेगा। कहा कि कठुआ में लापता नाबालिग बच्ची की अब तक मेडिकल रिपोर्ट नहीं आई है तो फिर जांच कैसे शुरू होगी। जल्द से जल्द मेडिकल रिपोर्ट मंगाई जानी चाहिए।
उमर ने कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी तथा इस संस्था की गरिमा का ख्याल रखा जाना चाहिए। फैसलों का एलान केंद्र से न होकर मुख्यमंत्री की ओर से किया जाना चाहिए। कहा कि पत्थरबाजों को छोड़ने का एलान केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा ने किया।
फिर राज्य सरकार ने पहल की। केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में सात सूत्रीय फार्मूले का एलान किया। रियासत और रियासती फैसले का एलान मुख्यमंत्री के द्वारा ही होना चाहिए न कि मरकजी सरकार द्वारा। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजों की एमेनस्टी पर भी कुछ स्पष्ट नहीं है।
इस पर नहीं जाऊंगा कि यह फरमान कहां से आया। कहा गया कि पहली बार पत्थरबाजी में शामिल युवाओं से मुकदमा हटेगा, फिर कहा गया कि दूसरी बार वालों को भी माफी मिलेगी। इसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।