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मसाला फिल्म की तरह है BJP का मिशन 44+

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अपने पिता के बिना जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में पहली बार अकेले पार्टी को लीड कर रहे नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष और रियासत के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए यह चुनाव इतना आसान नहीं होने जा रहा है।
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एक तो पिता के मार्गदर्शन का अभाव दूसरा रियासत की बदली हुई चुनावी फिजा कई चुनौतियां लेकर आई है। बता दें कि उमर के पिता फारूक अब्दुल्ला किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लंदन गए हुए हैं।

एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में उमर ने चुनाव में एंटी इनकमबेंसी, भाजपा, बाढ़ जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की।

अपनी परंपरागत सीट गंदरबल को क्यों छोड़ा?

मैंने दो साल पहले ही इसी घोषणा कर दी थी कि मैं गंदरबल से चुनाव नहीं लड़ुंगा। मैं सोनावर (जो कि मेरा घर है) या बीरवाह (मेरी नानी का घर) सीट से चुनाव में खड़ा हुआ हूं।
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शासनकाल की बड़ी उपलब्‍धियां कौन सी हैं?

आपके शासनकाल की बड़ी उपलब्‍धियां कौन सी हैं?

हमारी सरकार के दौरान आतंकवाद कम करके घाटी में शांति स्‍थापित की गई। पीडीपी-कांग्रेस सरकार (2002-2008) में रियासत में करीब 23 लाख पर्यटक आए थे ज‌बकि हमारी सरकार में करीब 50 लाख पर्यटक घाटी आए।

अफस्पा (AFSPA) को हटाने का वादा अधूरा रह गया। क्या मोदी सरकार इसे हटाएगी?

मैं भी चाहता हूं कि घाटी से अफस्पा को घाटी से हटाया जाए। लेकिन कुछ लोग इसका विरोध करते हैं। 2012 में कहा गया कि अमेरिका अपनी सेना को अफगानिस्तान से वापस बुलाक रहा है, ऐसे में अफस्पा को हटाना सही नहीं है। मैं बता रहा हूं, अब आईएसआईएस का बहाना बनाकर अफस्पा को लागू रखा जाएगा।

भाजपा की पकड़ मजबूत हो रही है?

क्या घाटी में बाढ़ के बाद नेकां विरोधी लहर है? आप बाढ़ के समय कम दिखाई दिए?

इस बारे में तो तभी पता चलेगा जब चुनावी नजीते हमारे सामने होंगे। लेकिन बाढ़ में पचास से भी कम लोग मारे गए हैं और बाढ़ के बाद बीमारी से एक भी मौत नहीं हुई है।

रही बात मेरे दिखने की तो, मैं बाढ़ के समय लाल चौक पर खड़ा होकर दिखाई दे सकता था, लेकिन उससे राहत कार्य तो बेहतर हो नहीं जाता। मैं खुद लोगों के बीच गया हूं।

क्या रियासत में भाजपा की पकड़ मजबूत हो रही है?

रियासत में यह संभाव ही नहीं है। खासकर कश्मीर घाटी में भाजपा के लिए पैठ बनाना नामुमकिन है।
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भाजपा का ‌'मिशन 44' कैसा लगता है?

आपको भाजपा का ‌'मिशन 44' कैसा लगता है?

आई लव मिशन 44, ये बॉलीवुड की किसी मसाला फिल्म के नाम की तरह लगता है।

अपने पिता की अनुपस्थिति में आप अकेले चुनाव में हैं, क्या इससे परेशानी हो रही है?

हां, स्वभाविक तौर पर परेशानियां बढ़ी हैं। मुझे अकेले ही पार्टी को लीड़ करना है। साथ ही अपने घर का भी ख्याल रखना है। मेरे पिता जो कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लंदन गए हुए हैं और मेरी मां जो कि किडनी डोनर हैं।

मुझे उन दोनों की भी फिक्र रहती है। मैं अपने पिता को मिस कर रहा हूं क्योंकि मेरे पास ऐसा कोई नहीं है जिसके साथ में अपने काम का बोझ साझा कर सकूं। इस मामले में मैं हूं, सिर्फ मैं और अकेला मैं ही हूं।
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