भाजपा ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में अपने मिशन 44 प्लस को अंजाम देने के लिए फार्मुला 32 आजमाने जा रही है। यह कोई टोटका नहीं बल्कि मुस्लिम कार्ड है।
रियासत की 87 विधानसभा सीटों में से करीब सत्तर सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही भाजपा ने 32 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है।
रियासत को भगवा रंग में रंगने के लिए भाजपा ने घाटी में 25 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है जबकि छह मुस्लिम प्रत्याशी जम्मू संभाग से और एक लद्दाख संभाग से चुनाव में खड़ा हो रहा है।
भाजपा केवल मुस्लिम ही नहीं सिख, कश्मीरी पंडित और बोध वोटों को भी झटकना चाहती है।
'27 सीटों पर बढ़त में चल रही है भाजपा'
मिशन 44 को पूरा करने के लिए भाजपा ने कश्मीर घाटी में चार कश्मीरी पंड़ित, एक सिख और तीन बोध प्रत्याशियों को लद्दाख से टिकट दिया है। भाजपा सांसद अविनाश राय खन्ना का कहना है कि, भाजपा अब घाटी में अपनी पहचान बनाने लगी है।
हमारी रैलियों और रोड शो में भी उतनी ही भीड़ आती है जैसे की नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी की रैलियों में आती है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में छह में से तीन सीटें जीती थीं, इस बार भाजपा इस अनुपात को बढ़ाना चाहती है।
खन्ना का कहना है कि हमने तीन सीटों पर कब्जा किया था और बाकी 27 विधानसभा सीटों पर (जहां लोकसभा चुनाव हुए थे) हम बढ़त में थे। अब हमें हमारे मिशन 44 को पूरा करने के लिए केवल 17 सीटों की जरूरत है।
दो खानदानों को टारगेट पर ले रहे मोदी
चुनाव में भाजपा बिना किसी विवाद में पड़े विकास के मुद्दे को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ रही है। भाजपा घाटी में अपनी छवि बदलने का प्रयास भी कर रही है, पार्टी खुद को मुस्लिम हितैषी दिखाना चाहती है, हालांकि अनुछेद 370 के मसले पर पार्टी को काफी आलोचना भी झेलनी पड़ रही है।
जिसके बाद पार्टी ने इसे चुनावी मुद्दा बनाने से इनकार करते हुए कहा कि, इस मासले पर हम वही करेंगे जो रियासत की जनता चाहती है। पार्टी का कहना है कि वह रियासत को दो खानदानों की सियासत से मुक्ति दिलाना चाहती है।
पिछले चुनावों में क्या हुआ था भाजपा का हाल
अविनाश खन्ना का कहना है कि, लोकसभा चुनावों के दौरान गंदरबल ओर कंगन सीट पर हुई पीएम मोदी की रैली में आई भीड़ से यह साफ है कि उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
बता दें कि 2008 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 60 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से 24 मुस्लिम, सात कश्मीरी पंडित प्रत्याशियों को टिकट दिया था, इनमें से 11 सीटों पर पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
जबकि 2002 के चुनाव में 58 सीटों पर चुनाव लड़कर भाजपा ने 17 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया था, इस चुनाव में पार्टी को केवल एक सीट हासिल हुई थी।