अमरनाथ दर्शन के दौरान मंत्रोच्चार पर एनजीटी के रोक के फैसले के बाद सियासत गरमा गई है। हांलाकि एनजीटी ने इस मामले में स्पष्टीकरण देते हुए फैसले को फिर से पारिभाषित किया है, लेकिन हिंदू संगठनों और सियासी दलों का गुस्सा अब भी कायम है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कहा है कि वह नहीं समझ पा रहे हैं कि जयकारों से पर्यावरण को क्षति कैसे पहुंचेगी। जम्मू-कश्मीर की सभी पार्टियां इस मामले को लेकर आंदोलित हैं। अधिकांश संगठनों ने इसे हिंदुओं की आस्था पर चोट करार दिया है। उनका साफ कहना है कि वह एनजीटी के आदेश का सम्मान करती हैं, लेकिन आस्था पर चोट भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि यह फैसला हमें स्वीकार नहीं है। हिमलिंग को प्रदूषण से बचाने के प्रयास जरूरी हैं लेकिन हिंदुओं की आस्था पर ठेस पहुंचाना गलत है। ऐसा कोई अध्ययन अभी तक सामने नहीं आया, जिसमें मंत्रोच्चार से अमरनाथ गुफा के पर्यावरण पर कोई असर पड़ने की बात सामने आई हो।