रियासत के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वीरवार को जिला सांबा में नौनाथ और चीची माता मंदिर में विस्थापित शिविर का दौरा कर लोगों की समस्याओं को सुना। इसके अलावा हीरानगर में सीमावर्ती विस्थापितों के शिविर में पहुंचे उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पहले लाइन ऑफ कंट्रोल पर तनाव रहता था।
सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं ज्यादा होती थीं लेकिन अब एलओसी से ज्यादा खराब हालात अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर होने लगे हैं। गोलीबारी का जवाब कैसे देना है, यह केंद्र सरकार तय करेगी लेकिन रियासती सरकार लोगों की सुविधाओं पर जरूरत के मुताबिक तवज्जो देगी।
उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल बार्डर से सटे इलाकों को भी एलओसी की तर्ज पर आरक्षण आदि अन्य सुविधाएं दिलाई जाएंगी।
चार दिन, आठ मौत, 80 से अधिक घायल
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर मुश्किल को हल करने में सरकार लोगों के साथ है। पाकिस्तान की ओर से की जा रही गोलाबारी पर उमर ने कहा कि पाकिस्तान खुद की आग में जल रहा है। उसके खुद के घर में आग लगी हुई है और वह हमारे घर को जलाने के लिए चिंगारी फेंक रहा है।
उन्होंने कहा कि वह उन जगहों पर बमबारी कर रहा है, जहां हमारी आबादी है। चार दिनों में आठ मौतें और 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की मांग है कि उन्हें सुरक्षित जगहों पर पांच-पांच मरले के प्लाट दिए जाएं, जिससे सीमा पर होने वाले तनाव के समय वे वहां पर सुरक्षित रह सकें।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच-पांच मरले सुरक्षित जगहों पर प्लाट देने के लिए नीति बनाई है और आने वाले समय में जगह का चयन किया जाएगा, ताकि वहां पर वह एक कमरा, रसोई बना सकें।
'दोस्त बनाए और बदले जा सकते हैं'
उमर ने कहा कि जिस तरह से नियंत्रण रेखा पर कैटागरी दी जाती है और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर भी उस तरह की कैटागिरी दी जाए और यहां के लिए स्पेशल भर्ती के बारे में भी सरकार विचार कर रही है।
उससे पहले जिला कठुआ में का भी मुख्यमंत्री ने दौरा किया। सीएम ने कठुआ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दोस्त बनाए और बदले जा सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं।
इस बात को पाकिस्तान नहीं समझ रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार को स्थायी हल खोजने की जरूरत है। हालात सामान्य होते ही राज्य सरकार मरकजी सरकार के साथ इस मामले को प्रमुखता से उठाएगी।