रोशनी घोटाले की जांच में राजस्व विभाग सीबीआई को सहयोग नहीं कर रहा है। सिर्फ एक जानकारी लेने के लिए उसे कम से कम दस बार पत्र लिखना पड़ रहा है। यह बात सोमवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने हाईकोर्ट को बताई। पूरी दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने महसूस किया कि इस मामले को लेकर दिए गए आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है। छह सितंबर को दोबारा इस मामले पर सुनवाई होगी।
दरअसल, रोशनी योजना के तहत जमीनें लेने वालों से हाईकोर्ट ने इसे वापस लेने का आदेश दिया है। अभी तक किसी से भी जमीन वापस नहीं ली गई है। एडवोकेट अंकुर शर्मा ने बताया कि कोर्ट में सीबीआई ने कहा है कि राजस्व विभाग की तरफ से उन्हें जांच को आगे बढ़ाने में पूर्ण तरीके से सहयोग नहीं किया जा रहा। जब भी उन्हें कोई जानकारी चाहिए होती है तो विभाग के अधिकारी बार-बार कहने पर भी सूचना देने में आनाकानी करते हैं।
इसकी वजह से जांच में दिक्कत पेश आ रही है। अंकुर ने बताया कि कोर्ट ने सरकार से कहा है कि पहले दिए गए आदेश का पालन करवाया जाए। कोर्ट ने इससे पहले अपने आदेश में जमीनें खाली कराने को कहा था, जिस पर अमल नहीं हुआ है।
25 हजार करोड़ का है घोटाला
रोशनी घोटाला 25 हजार करोड़ रुपये का है। प्रदेश की 25 लाख कनाल जमीन रोशनी योजना के तहत बेहद कम दामों में लोगों को दी गई थी। कई अफसरों, नेताओं, माफियाओं, कारोबारियों ने योजना के तहत जमीन सस्ते दाम पर ली हैं। इसे लेकर एडवोकेट अंकुर शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसके बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। इसके पहले जांच एंटी करप्शन ब्यूरो कर रहा था।