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अब कांग्रेसी नेता भी करने लगे हैं हिंदू मुख्यमंत्री की बात

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चुनावबाज नेता वोटों के ध्रुवीकरण के लिए नए-नए पैंतरे आजमाने लगे हैं। मुस्लिम बहुल इस रियासत में कश्मीरी और जम्मू संभाग के नेता  अपने वोट बैंक को पुख्ता करने के लिए अलग-अलग तर्क गढ़ रहे हैं। जम्मू कश्मीर रियासत का अपना संविधान है और उस संविधान में रियासत के लिए धर्मनिरपेक्ष शब्द का उल्लेख नहीं है।
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सियासी दलों के मुखिया बयानबाज नेताओं की टिप्पणियों को उनके निजी विचार कहकर मुद्दे को रफादफा करने की भी कोशिश कर रहे हैं। पर मुद्दा अब तूल पकड़ने लगा है। चुनाव तारीखें नजदीक आते ही मुद्दे पर पड़ी राख को हटाकर कुछ नेता फिर से चिंगारी सुलगाने लगे हैं।

पीडीपी नेता विधायक पीरजादा मंसूर द्वारा रियासत के लिए मुस्लिम मुख्यमंत्री की अनिवार्यता बताने के बाद विवाद ताजा हो गया। मंसूर ने कहा कि कुछ लोग हिंदी सीएम थोपने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन इस मुसलिम बहुल रियासत का सीएम कोई मुस्लिम ही हो सकता है। हिंदू सीएम से कश्मीर समस्या के राजनीतिक समाधान में बाधा आएगी।
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मंसूर के इस बयान के बाद सियासी तूफान खड़ा होने पर पीडीपी ने पल्ला झाड़ लिया। पार्टी के प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि उनकी पार्टी का धर्म निरपेक्षता में अटूट विश्वास है। पार्टी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद हिंदू बहुल आरएसपुरा से विधायक रहे हैं। योग्यता और लोकप्रियता ही मुख्यमंत्री पद का आधार हो सकते हैं।
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वोटों के ध्रुवीकरण के लिए चुनावबाज नेता दे रहे हवा

हिंदू सीएम के पक्ष में कांग्रेसी नेता भी कूद पड़े हैं। कांग्रेस नेता और पीएचई मंत्री शाम लाल शर्मा ने मंसूर के बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है। शाम ने कहा कि रियासत के लिए हिंदू सीएम वक्त की जरूरत बन गई है। जम्मू और लद्दाख के साथ भेदभाव तभी रुकेगा जब कोई हिंदू मुख्यमंत्री बने।

मंसूर का बयान संविधान की भावना के खिलाफ है। इसलिए उनपर कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेसी मंत्री पहले भी हिंदू सीएम का मुद्दा उठा चुके हैं और रियासत कांग्रेस के अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज ने इसे मंत्री का निजी विचार बताकर उसे पल्ला झाड़ लिया था। हालांकि, कश्मीर में वोटों के ध्रुवीकरण के लिए सोज अब खुद इस चुनाव को कश्मीर बनाम आरएसएस की संज्ञा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे को खारिज कर दिया है। उनका मानना है कि यह फिजूल का विवाद है। विधायकों की संख्या से मुख्यमंत्री तय होता है। इसलिए इसे तूल नहीं दिया जाना चाहिए। भाजपा के रियासत अध्यक्ष सांसद जुगल किशोर शर्मा भी ऐसी ही राय रखते हैं। उनका कहना है कि सीएम कोई भी हो सकता है लेकिन इस बार वह भाजपा का ही होगा। पीडीपी हार के डर से समाज को बांटने के एजेंडे पर चल रही है।
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