यात्री वाहनों में महिलाओं के लिए आरक्षित की गई सीटों का कोई लाभ नहीं हो रहा। सीटें आरक्षित होने के बावजूद महिलाओं को खड़े होकर बसों और मेटाडोर में सफर करना पड़ता है। राज्य परिवहन विभाग के पास पिछले एक साल से इस पर सख्ती से अमल करने की शिकायतें पहुंच रही हैं। जिस पर कोई अमल नहीं हुआ।
अब सरकार ने निर्णय लिया है कि बहुत जल्द यात्री वाहनों में आरक्षित सीटों पर महिलाओं को जगह देनी ही होगी, यदि कोई बस चालक ऐसा नहीं करेगा तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है। परिवहन मंत्री अब्दुल गनी कोहली ने बताया कि सीटें आरक्षित होने के बाद भी कोई अमल नहीं। हर एक बस में 1 से 13 तक सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं।
इस आंकड़े को बढ़ाया जाएगा। सीटों को 20 तक किया जाएगा। जल्द ही बस और मेटाडोर चालकों के साथ बैठक कर इस पर अमल करने के लिए कहा जाएगा। मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि स्कूलों, कालेजों और महिलाओं के लिए अलग से बसें चलाई जा सकती हैं। फिलहाल अभी यह दिल्ली में ही है। जम्मू में इसकी संभावनाओं को देखा जा रहा है।
इसका ट्रायल करके देखा जाएगा, यदि सफलता मिली तो बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। हर एक रूट पर कम से कम एक बस चलाई जाएगी, जिससे सुबह बच्चियां और महिला कर्मचारी आराम से पहुंच सकें। उल्लेखनीय है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में चलने वाली बसों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर महिलाओं को बैठने की जगह नहीं मिलती। विकलांगों के लिए भी सीटें आरक्षित होती हैं। लेकिन यह सीटें विकलांगों को बैठने के लिए नहीं मिलती।