आतंकवादग्रस्त जम्मू-कश्मीर में पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद होने से हवाला राशि और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले ओवर ग्राउंड वर्कर्स प्रभावित हुए। पत्थर मारने वाले युवाओं के लिए भी हवाला के जरिये आई राशि स्वाह हो गई। अलगाववादियों के भी होश उड़ गए हैं।
घर में करोड़ाें रुपये दबाकर रखने वाले देशद्रोही लोगों के पास घर में रखी राशि को व्हाइट करने की दिक्कतें पैदा हो गई हैं। खुफिया विभाग के सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2015-2016 के आकलन के मुताबिक दस हजार करोड़ रुपये जम्मू कश्मीर में नकली नोट हवाला राशि, आतंकी फंडिंग और पत्थरबाजों के लिए सप्लाई हुए हैं।
जम्मू कश्मीर में पांच सौ और एक हजार के रुपये बंद होने के कारण सबसे अधिक प्रभाव आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों पर पड़ा।
पत्थरबाजों को दिहाड़ी देने के लिए होता था इस्तेमाल
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पिछले कई साल से छदम् युद्ध झेल रहे जम्मू कश्मीर में नकली नोटों का चलन काफी है। इस आदेश से करोड़ों रुपये नकली नोट मार्केट से गायब हो गए। कश्मीर मेें भी सीमा पार से आतंकियों को फंडिंग के लिए करोड़ों रुपये भेजे गए हैं। ओवरग्राउंड वर्कर भी सक्रिय हैं, जो सीमा पार से आए रुपयों को आतंकियों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।
इन ओवर ग्राउंड वर्करों के पास भी काफी रुपया है। वह भी स्वाह हो गए। हवाला राशि का भी चलन काफी रहा है। सूत्रों के अनुसार हवाला राशि का सबसे अधिक घाटी में चलन रहा है। इस राशि का उपयोग पत्थरबाजों को दिहाड़ी देने के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है।
इससे पहले आतंकी सरगनाओं के लिए भी हवाला राशि के जरिये रुपया दिया जाता रहा है। अब इस राशि को उपयोग करना भी बंद हो जाएगा। सबसे बड़ी चोट इसी क्षेत्र में पड़ी है।
आतंकियों की फंडिग के लिए हवाला का हो रहा था इस्तेमाल
आतंकियों की फंडिग
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सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोटों पर लगे बैन को सारे देश में आर्थिक सुधार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पर नोट बैन का फैसला जितना आर्थिक सुधार के लिहाज से बेहतर है उतना ही सुऱक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण भी।
एक ओर जहां पाकिस्तान की ओर से आतंकियों को फंडिग करने के लिए हवाला के रास्ते का इस्तेमाल हो रहा था वहीं कई बार आतंकियों को नकदी के रूप में काला धन और जाली करेंसी देने की बात सामने आ चुकी है।
इसके अलावा पिछले कुछ दिनों में सेना द्वारा जिन जिन आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया है उनमें से कई में भारतीय मुद्राओं के मिलने की बात सामने आई थी।