फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां एक भी महिला इंस्पेक्टर नहीं, पढ़ें खबर

विज्ञापन
विज्ञापन
संभाग 91 थानों में महिला इंस्पेक्टर नहीं हैं। यहां तक कि  किसी थाने में महिला मुंशी भी नहीं। राज्य पुलिस में महिला अधिकारियों का टोटा इस कदर है कि किसी थाने में महिला थानेदार का रोब नहीं दिखता। पूरे संभाग में चार महिला अधिकारी ही सक्रिय हैं।
विज्ञापन


इनमें कठुआ की एसपी, नौशेरा थाने की आईपीएस अधिकारी, ग्रेटर कैलाश में पुलिस चौकी की सब इंस्पेक्टर और जम्मू महिला पुलिस सेल की सब इंस्पेक्टर ही तैनात हैं। इन अधिकारियों को छोड़ दिया जाए कि तो किसी थाने में महिला थानेदार नहीं है।

जम्मू 26, सांबा छह, कठुआ आठ, उधमपुर 10, डोडा छह, किश्तवाड़ पांच, रामबन सात, रियासी आठ, राजोरी 10, पुंछ में छह थाने हैं लेकिन जिले के किसी भी थाने में महिला पुलिस इंस्पेक्टर नहीं है।
विज्ञापन


कठुआ में एसपी नेवा जैन, नौशेरा में एसडीपीओ सरगम शुक्ला, ग्रेटर कैलाश में सब इंस्पेक्टर नीलम सैनी और महिला पुलिस सेल में सब इंस्पेक्टर आरती ठाकुर तैनात हैं। बाकी के किसी थाने में कोई महिला इंस्पेक्टर नहीं है।
विज्ञापन

महिलाओं को होती है परेशानी

किसी भी थाने में शिकायत लेकर पहुंचने वाली महिलाओं में हमेशा असहजता की स्थिति बनी रहती है। वह चाहकर भी थानेदार को खुलकर अपने साथ हुई घटना नहीं बता पातीं।

थानों में महिलाएं अपने आप को असहज महसूस करती हैं। यही नहीं, किसी थाने में महिला मुंशी भी नहीं। किसी भी थाने में शिकायत दर्ज करने के लिए मुंशी के पास ही जाना होता है, लेकिन कहीं पर भी महिला मुंशी न होने से महिलाएं खुलकर बात नहीं कर पाती।

महिला मुंशी नहीं होने का सबसे बड़ा कारण उर्दू की ज्ञान नहीं होना है। अधिकतर थानों में शिकायत उर्दू में ही दर्ज होती है। पुलिस में तैनात होने वाली महिलाओं को उर्दू नहीं आता।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें