शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने रियासत जम्मू-कश्मीर में शिक्षा को तबादला बाजार से मुक्त करवाने के लिए ठोस तबादला नीति लाने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि तबादला नीति में तय अवधि से कम या ज्यादा समय से पूर्र्व तबादले नहीं हो पाएंगे।
शिक्षा राज्य मंत्री प्रिया सेठी, स्कूली शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव शालीन काबरा, उच्च शिक्षा विभाग की आयुक्त सचिव सरीता चौहान की मौजूदगी में रविवार को पत्रकार सम्मेलन में कहा कि जम्मू कश्मीर में शिक्षा विभाग की अब तक कार्यशैली में उन्होंने गंभीर कमियां पाई हैं।
उन्होंने पाया है कि तबादलों का बाजार गर्म रहा है। बच्चों को शिक्षा देने की तरफ कम ध्यान रहा। शहरी स्कूलों में हद से ज्यादा शिक्षक तैनात हो गए और दूरदराज के गांवों में शिक्षकों की भारी कमी रही। 124 सरकारी (प्राइमरी) स्कूल बिना विद्यार्थियों के ही चलते रहे।
लगातार गिर रहा शिक्षा का स्तर
जम्मू संभाग में 3611 सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी की संख्या केवल एक से बीस तक ही है। यही हाल कश्मीर संभाग में भी है। वहां पर 1383 सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या एक से लेकर पचास तक ही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग को पटरी पर लाना बड़ी चुनौती है। उन्हें थोड़ा समय चाहिए इसके बाद वह नाकाम होंगे या असफल, इसका निर्णय रियासत की जनता करेगी।
अख्तर ने कहा कि शिक्षा विभाग को सालाना 6000 करोड़ का फंड मिलता है। इतनी राशि के बावजूद सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता का स्तर गिरता जा रहा है। रियासत मौजूदा समय में राष्ट्रीय आधार पर निचले स्तर से छठे स्थान पर है।
उनकी योजना है कि स्कूल पढ़ाई के लिए हों, न कि तबादला और सियासत के लिए। पाठ्यक्रम को मौजूदा समय लायक बनाने के लिए विशेषज्ञ कमेटी बनेगी।
हर कॉलेज पर खर्च होंगे 27 करोड़
जम्मू के दो और कश्मीर के दो स्कूल, जिसमें रणवीर हायर सेकेंडरी परेड, सुंजवा स्कूल का विकास और सुविधाएं उच्च स्तर की मुहैया करवाई जाएंगी।
इसी तरह कश्मीर में एसपी और एमपी स्कूलों को लिया जाएगा। खराब परिणाम के लिए जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। इसी तरह विरासत कालेज बनाए जाएंगे और प्रत्येक ऐसे कालेज पर 27 करोड़ की राशि खर्च होगी।
मुख्य शिक्षा अधिकारी स्तर के अधिकारी माह में पंद्रह दिन अपने क्षेत्राधिकार वाले स्कूलों का दौरा करेंगे और अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। बहरहाल मंत्री ने कहा कि वह कार्रवाई करने से ज्यादा काम करने पर यकीन करेंगे।