सेना के अधिकारियों ने कमांडर शर्मा को क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और ऑपरेशनल तैयारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने उन्हें सतर्कता, प्रशिक्षण, आपसी समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपनाई जा रही नई कार्यप्रणालियों से अवगत कराया। सेना के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य नियंत्रण रेखा और उससे सटे आंतरिक क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना तथा प्रभावी सुरक्षा स्थिति को कायम करना है।
लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने तैनात जवानों से बातचीत कर उनकी तैयारियों और क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने जवानों के पेशेवर रवैये, समर्पण और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवान सीमा पार की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखें। संभावित चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उच्चस्तर की ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखने पर जोर दिया गया।
मुठभेड़ में मूसा की मौत के बाद आतंकी रच रहे षड्यंत्र, सुरक्षाबलों ने बढ़ाई चौकसी
दक्षिण कश्मीर के यूसमर्ग में 29 सितंबर को मुठभेड़ में लश्कर-ए-ताइबा के टॉप कमांडर सुलेमान शाह उर्फ फौजी मूसा की मौत के बाद बौखलाए आतंकी हमले की साजिश रच रहे हैं। आतंकी मूसा की मौत का बदला लेने के लिए सुरक्षा प्रतिष्ठानों, धार्मिक स्थलों, वीआईपी, प्रवासी मजदूरों और भीड़भाड़ वाले बाजारों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
इस खुफिया इनपुट के बाद प्रदेश में संवेदनशील इलाकों में चौकसी बढ़ा दी गई है। पुलिस को जमीन पर ज्यादा सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। मूसा की मौत के बाद प्रदेश में लश्कर-ए-ताइबा बिना कमांडर के माना जा रहा है। मूसा 2022 में घुसपैठ कर घाटी में घुसा था। इसके बाद से अपने नेटवर्क को लगातार सक्रिय करने में जुटा था।
वह जम्मू और कश्मीर संभाग के पीर पंजाल में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने में लगा था। मूसा की मौत के बाद से ही राजोरी और उधमपुर जिले में संदिग्ध देखे गए हैं। इस बीच मिले खुफिया इनपुट के बाद सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा पुख्ता की गई है। शहरों और संवेदनशील इलाकों में मोबाइल सरप्राइज चेकिंग शुरू की गई है। सड़कों पर वाहनों की जांच के साथ रात की गश्त बढ़ाई गई है। संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए नाकों पर भी सतर्कता बरती जा रही है।
आतंकियों की गतिविधियों पर नजर
जम्मू-कश्मीर में सक्रिय करीब 35 से 40 विदेशी आतंकियों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का फोकस घुसपैठ की कोशिशों के साथ सक्रिय आतंकियों के नेटवर्क को तोड़ने और किसी संभावित हमले को अंजाम तक पहुंचने से पहले रोकने पर है।