उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कृषि और बागवानी के क्षेत्र में यह दशक जम्मू-कश्मीर का है। समग्र विकास योजना के माध्यम से नीतियां जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास में परिवर्तन ला रही हैं। हमारा प्रयास उप-उष्णकटिबंधीय फलों की खेती को बहुआयामी व्यवसाय बनाना है, जिसमें नई नर्सरी और पौध सामग्री परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना जैसे हस्तक्षेपों की मदद से बागवानों की दक्षता में वृद्धि की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के भीतर स्थानीय स्तर पर 80 प्रतिशत चारे की आवश्यकता को व्यवस्थित करने और विकसित करने का प्रावधान किया गया है। इस दौरान मेगा फ्रूट प्लांट नर्सरी चकरोई पत्रिका, लीची और स्ट्रॉबेरी की खेती व स्टोन फ्रूट के रणनीतिक प्रबंधन सहित कई प्रकाशन जारी किए गए।
उपराज्यपाल ने एक पौधा भी लगाया। कार्यक्रम में डीडीसी अध्यक्ष जम्मू भारत भूषण, कृषि उत्पादन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लू, मंडलायुक्त जम्मू रमेश कुमार, वीसी स्कॉस्ट जम्मू प्रो. जेपी शर्मा आदि मौजूद रहे।
उपराज्यपाल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में लगभग 31 लाख भूमि पासबुक सृजित की गई हैं। इसके साथ 400 से अधिक सार्वजनिक सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रावधान के साथ पूरी तरह से ऑनलाइन किया गया है।
रणबीर नहर के निर्बाध और समुचित संचालन के लिए एक नीति के माध्यम से स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। यह स्पष्ट किया कि सब्सिडी प्राप्त करने के लिए क्षेत्र के बाहर से मवेशियों की अनिवार्य खरीद के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है और अगर कोई है तो मैं इसे शून्य घोषित करता हूं।
मेगा फ्रूट प्लांट नर्सरी में खट्टे फलों सहित विभिन्न फलों के मदर प्लांट उगाने के लिए 50 अलग-अलग ब्लॉक स्थापित हैं। यह नर्सरी 800 कनाल से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है और इसमें अमरूद, आम, लीची, अन्य खट्टे फलों और ड्रैगन फ्रूट के पौधे उगाए जाएंगे।
यह उत्तर भारत में फलों की सबसे नर्सरी है। आगामी समय में 10 लाख फलदार पौधे किसानों में बांटे जाएंगे। नर्सरी में सिंचाई के लिए अन्य उन्नत सुविधाओं और आधुनिक उपकरणों के अतिरिक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की स्थापना की गई है। यहां टिश्यू कल्चर लैब आदि स्थापित की जाएंगी।