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कश्मीरी पंडितों के लिए बुरी खबर, जानिए पूरा मामला

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सरकार कश्मीरी पंडितों के लिए अलग टाउनशिप बनाए जाने की योजना संबंधी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। विस्थापित समुदाय के लिए अलग टाउनशिप पर उपजे विवाद को खत्म करते हुए सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी लोकसभा में दी।
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नौ सांसदों की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हरिभाई पी चौधरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के लिए अलग क्षेत्र में टाउनशिप बनाए जाने के प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जा रहा है।

कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास से जुड़े सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कश्मीरी विस्थापितों को दी जाने वाली राहत राशि एक मई से 1,650 रुपये से बढ़ाकर 2,550 रुपये कर दी गई है।
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यह राशि 62,000 पंजीकृत विस्थापित परिवारों में से करीब 21,700 परिवारों को दी जा रही है।
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टाउनशिप में मिलजुल कर रहेंगे सब लोग

गौरतलब है कि रियासत में विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस के साथ ही अलगाववादी समूहों ने कश्मीरी पंडितों के लिए अलग टाउनशिप बनाए जाने संबंधी प्रस्ताव का विरोध किया था।

इस मुद्दे पर अलगाववादियों ने बंद का आयोजन भी किया था। रियासत सरकार ने बाद में सफाई देते हुए कहा था कि टाउनशिप में कश्मीरी पंडित, मुस्लिम, सिख व बौद्घ समेत मिलेजुले धर्मों के लोग रहेंगे।

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ही मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने दिल्ली दौरे के क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। केंद्रीय गृह मंत्री ने कश्मीरी पंडितों के टाउनशिप के लिए 50 एकड़ जमीन की मांग मुफ्ती से की थी।
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अलगवावादियों के दबाव में मुफ्ती सरकार

मुफ्ती ने इस पर सहमति जताते हुए भूमि उपलब्ध कराने का वादा किया था। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ ने मुफ्ती के उस वादे को कई बार दोहराया है।

इस बीच अलगाववादियों और विपक्षी दलों के विरोध के बाद रियासत सरकार ने मुद्दे पर पहले यू-टर्न लिया और बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।

उधर कश्मीरी पंडितों ने इस मुद्दे पर दिल्ली में प्रदर्शन कर अपने हक की मांग पर जोर दिया। कश्मीरी पंडित चाहते हैं कि मुद्दे पर कोई फैसला उनसे बातचीत कर किया जाए।

केंद्र सरकार के ताजा रुख के बाद मुफ्ती सरकार राहत महसूस कर सकती है। इससे अलगाववादियों और नेकां समेत अन्य विपक्षी दलों से विरोध का मुद्दा छिन सकता है।
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