रबी सीजन पर सूखे का संकट गहरा गया है। रियासत के अधिकांश इलाकों में 26 सितंबर के बाद से बारिश की एक बूंद तक नहीं बरसी है। सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर कंडी और पर्वतीय इलाकों का रबी सीजन तकरीबन चौपट हो गया है।
समय से पहले (अर्ली सोन) और समय पर (मिड सोन) लगने वाली वैराइटी की फसलों की बीजाई अब नहीं हो पाएगी। महज देरी से लगने वाली (लेट सोन) किस्मों की ही उम्मीद बची है। सूखे का संकट पिछले साल भी था, पर इस मर्तबा हालात और भी गंभीर हैं।
रबी सीजन की खेती का सिलसिला अक्तूबर से शुरू होता है। रियासत में लगभग सवा तीन लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी की फसलें लगती हैं। जम्मू संभाग के निचले मैदानी (सिंचित) इलाके को छोड़ दिया जाए तो पूरी ड्राइलैंड बेल्ट ही सूखा झेल रही है।
नमी के लिए बारिश का इंतजार कर रहे किसान
बारिश के लिए इंतजार कर रहे किसान
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एडवांस सेंटर फार रेनफैड एग्रीकल्चर के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. अरविंद प्रकाश सिंह के अनुसार ड्राईलैंड बेल्ट में 70 दिन से बारिश नहीं हुई है। गेहूं, चना, सरसों और मटर की बुआई नहीं हो पाई है। कई जगह किसान खेत जोत कर नमी के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
शेरे कश्मीर यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के एग्रोमेट विंग प्रभारी डॉ. मोहिंदर सिंह के मुताबिक देरी से लगने वाली फसल की वैराइटी को नमी मिल जाए तो थोड़ी बहुत भरपाई हो सकती है, वर्ना पूरा सीजन चौपट हो जाएगा।
पिछले साल भी गहराया था बारिश का संकट
पिछले साल भी गहराया था बारिश का संकट
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वर्ष 2015 में रबी के सीजन पर सूखे का संकट मंडराया था। 23 सितंबर को 48 एमएम बारिश रिकार्ड हुई। इसके बाद अक्तूबर में 26.7 एमएम, नवंबर में 2.4 एमएम, दिसंबर में 18.0 एमएम बारिश हुई।
वहीं जनवरी में 10.6 एमएम, फरवरी में 7.8 एमएम और मार्च में 52.8 एमएम बारिश रिकार्ड हुई थी। यानी शुरुआती सूखे के बाद समय-समय पर हुई बारिश फसलों के लिए जीवन रक्षक साबित हुई। इस साल हालात बदतर हैं।