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सरकारी अस्पतालों में न्यूरो सर्जन का अभाव, मरीज राम भरोसे

Thu, 06 Nov 2014 01:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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संभाग के दस जिलों में सड़क हादसों और अन्य दूसरी घटनाओं में रोजाना बड़ी संख्या में लोगों को हेड इंजूरी (दिमाग) के जख्म मिल रहे हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों में न्यूरो सर्जनों के अभाव में अधिकांश की जिंदगी राम भरोसे ही रहती है।
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संभाग की लाखों की आबादी पर जम्मू में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन दो अस्पतालों में सिर्फ तीन ही न्यूरो सर्जन उपलब्ध हैं। इनमें एक कंसलटेंट और दो सर्जरी में सेवाएं दे रहे हैं। जिससे तीमारदारों को मजबूरन अपने गंभीर मरीजों को उचित इलाज के लिए दूसरे राज्यों में ले जाना पड़ रहा है।

जीएमसी में हर हफ्ते 250-300 के बीच सड़क हादसों के घायल पहुंच रहे हैं। इसमें बड़े हादसों में घायलों की संख्या बढ़ जाती है। इनमें रोजाना 4-5 मामले हेड इंजूरी के शामिल होते हैं। जिसमें गंभीर मरीजों को तुरंत न्यूरो सर्जरी की जरूरत होती है।
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लेकिन अधिकांश मामलों में तीमारदारों को न्यूरो सर्जरी का इंतजार ही करना पड़ता है। संभाग स्तर पर सिर्फ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ही न्यूरो सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग के अधीन गांधीनगर अस्पताल में एक न्यूरो सर्जन उपलब्ध हैं।

लेकिन नियमों के तहत यहां सर्जरी की व्यवस्था न होने से वह कंसलटेंट ही सेवाएं दे रहे हैं। यानी संभाग के दस जिलों के लोगों को न्यूरो सर्जरी के लिए एकमात्र अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जिला स्तर पर किसी भी अस्पताल में न्यूरो सर्जन न होने के कारण सिर की छोटी बड़ी चोट के लिए मरीजों को मजबूरन शहरी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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इससे मरीजों के रेफर सिस्टम पर कोई अंकुश नहीं लग पाया है। मरीजों को शहरी अस्पतालों में आने पर समय की बरबादी के साथ आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
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